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पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण पर बड़ा सवाल, पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच अब सबसे ज्यादा चर्चा पंचायतों में आरक्षण की तस्वीर को लेकर है। खास तौर पर पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को इसी प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़े आंकड़ों और आगे होने वाली आरक्षण प्रक्रिया की स्थिति ज्यादा स्पष्ट होने की संभावना है। इसके बाद ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर सीटों की स्थिति को लेकर दावेदारों की तस्वीर भी साफ हो सकेगी।

आरक्षण तय होते ही बदलेंगे कई दावेदारों के समीकरण

पंचायत चुनाव में सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी, इसका सीधा असर संभावित उम्मीदवारों की दावेदारी पर पड़ता है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने से पहले कई संभावित उम्मीदवार अपनी रणनीति अंतिम रूप नहीं दे पा रहे हैं।

गांवों में ऐसे दावेदार भी नजर बनाए हुए हैं, जो लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। आरक्षण सूची जारी होने के बाद उन्हें अपनी सीट पर चुनाव लड़ने या किसी दूसरे क्षेत्र से विकल्प तलाशने का फैसला करना पड़ सकता है।

पार्टी के सिंबल पर चुनाव नहीं, फिर भी राजनीतिक नजर

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते। इसके बावजूद इन चुनावों के परिणामों को राजनीतिक दलों के लिए स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है।

ग्राम स्तर पर किस उम्मीदवार को समर्थन मिला, किन क्षेत्रों में स्थानीय संगठन सक्रिय रहा और किन सामाजिक समीकरणों का असर दिखाई दिया—इन पहलुओं को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने स्तर पर देखते हैं।

ग्राम पंचायत से जिला पंचायत तक आरक्षण का असर

आरक्षण की प्रक्रिया का प्रभाव ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की सीटों पर पड़ता है। सीट की श्रेणी स्पष्ट होने के बाद ही बड़ी संख्या में संभावित दावेदार अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दे सकेंगे।

इसी कारण पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली आरक्षण प्रक्रिया को पंचायत चुनाव की तैयारियों का अहम चरण माना जा रहा है।

गांवों में भी रिपोर्ट का इंतजार

पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवार और स्थानीय स्तर के राजनीतिक कार्यकर्ता आरक्षण की स्थिति का इंतजार कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में दावेदारों ने जनसंपर्क शुरू कर रखा है, लेकिन अंतिम आरक्षण सूची आने तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी।

आरक्षण में बदलाव होने पर स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों की दावेदारी और चुनावी तैयारियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

अब रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया पर नजर

फिलहाल पंचायत चुनाव की पूरी तस्वीर आरक्षण प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही स्पष्ट होगी। पिछड़ा वर्ग की सीटों के निर्धारण में आयोग की रिपोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ऐसे में सवाल सिर्फ पंचायत चुनाव की तारीख को लेकर नहीं है। उससे पहले यह देखना भी अहम होगा कि आरक्षण की तस्वीर कब साफ होती है और आरक्षण सूची सामने आने के बाद गांवों में संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय समीकरणों में क्या बदलाव आता है।

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