कोरारी कलां में बिजली की आंख-मिचौली से हाहाकार, रातभर 10-10 मिनट में कट रही सप्लाई

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News
उन्नाव। बिछिया पावर हाउस से जुड़े जगवा फीडर-2 के अंतर्गत आने वाले कोरारी कलां गांव में पिछले करीब 15 दिनों से बिजली आपूर्ति को लेकर ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दिन की अपेक्षा रात में बिजली कटौती की समस्या सबसे ज्यादा गंभीर हो जाती है। बिजली आने के कुछ ही देर बाद फिर गुल हो जाती है और कई बार करीब 10-10 मिनट के अंतराल पर बिजली काटे जाने का सिलसिला पूरी रात चलता रहता है।
गर्मी और उमस के बीच लगातार बिजली की आंख-मिचौली ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। घरों में लगे पंखे और कूलर बंद होने से बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात में बार-बार बिजली आने-जाने से न तो चैन से सो पा रहे हैं और न ही लगातार चल रही गर्मी से राहत मिल रही है।
15 दिन से नहीं सुधरी व्यवस्था
ग्रामीणों के मुताबिक कोरारी कलां में यह समस्या एक-दो दिन की नहीं, बल्कि करीब 15 दिनों से लगातार बनी हुई है। कई रात ऐसी गुजर रही हैं, जब बिजली कुछ मिनट के लिए आती है और फिर दोबारा चली जाती है। कुछ समय बाद सप्लाई बहाल होती है तो लोगों को उम्मीद होती है कि अब बिजली लगातार मिलेगी, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर कटौती हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की बार-बार होने वाली कटौती से गांव की बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फोन करो तो कभी रोस्टिंग, कभी तार टूटने का हवाला
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली समस्या की शिकायत के लिए जब विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों को फोन किया जाता है तो अलग-अलग कारण बताए जाते हैं। कभी रोस्टिंग का हवाला दिया जाता है तो कभी तार टूटने या तकनीकी खराबी की बात कही जाती है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि समस्या लगातार बनी हुई है तो इसकी स्थायी जांच कराकर समाधान क्यों नहीं किया जा रहा। उनका कहना है कि हर बार अलग कारण बताकर शिकायत को टालने के बजाय विभाग को यह पता करना चाहिए कि रात में बार-बार बिजली क्यों काटी जा रही है।
गांव में अंधेरा, फैक्ट्री एरिया में बिजली देने का आरोप
ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि गांव में रात के समय बार-बार बिजली काटी जा रही है, जबकि आसपास के फैक्ट्री/औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति जारी रहने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों की बिजली कटौती कर औद्योगिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हो रहा है तो बिजली विभाग को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हालांकि औद्योगिक क्षेत्र को गांव की सप्लाई काटकर बिजली दिए जाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रदेश में गांवों को बिजली देने के दावे पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से गांवों में निर्धारित अवधि तक बिजली उपलब्ध कराने की बात कही जाती है, लेकिन कोरारी कलां में लगातार हो रही अघोषित कटौती से जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें 20 घंटे बिजली मिलने की उम्मीद है, लेकिन मौजूदा स्थिति में रातभर बिजली के आने-जाने का सिलसिला बना हुआ है। ऐसे में सरकारी दावों और गांव में मिल रही बिजली के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।
बिजली की कटौती से रोजमर्रा का काम प्रभावित
लगातार बिजली कटौती का असर केवल रात की नींद तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक बिजली नहीं रहने से घरों में पानी की व्यवस्था, मोबाइल चार्जिंग, बच्चों की पढ़ाई और अन्य घरेलू काम प्रभावित हो रहे हैं।
कई ग्रामीणों का कहना है कि रात में बिजली जाने के बाद इन्वर्टर भी कुछ समय बाद जवाब दे देता है। इसके बाद परिवारों को गर्मी में बिना पंखे और कूलर के रात गुजारनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग उठाई
ग्रामीणों ने बिछिया पावर हाउस और संबंधित बिजली अधिकारियों से मांग की है कि जगवा फीडर-2 की आपूर्ति व्यवस्था की जांच कराई जाए। रात के समय होने वाली बार-बार की कटौती का कारण स्पष्ट किया जाए और यदि कहीं तकनीकी समस्या है तो उसका स्थायी समाधान कराया जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि फीडर पर लोड या रोस्टिंग की वजह से कटौती हो रही है तो विभाग इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करे, ताकि लोगों को बार-बार शिकायत के लिए फोन न करना पड़े।
जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 15 दिनों से समस्या झेलने के बाद अब उन्हें विभाग से ठोस कार्रवाई की उम्मीद है। उनका कहना है कि यदि तार टूटने, ओवरलोड या अन्य तकनीकी कारण से समस्या है तो विभाग को उसकी जांच कराकर व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रात में होने वाली बार-बार की बिजली कटौती पर रोक नहीं लगी और गांव की आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे विभागीय अधिकारियों के सामने सामूहिक रूप से शिकायत दर्ज कराने के साथ विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है—जब गांव की बिजली व्यवस्था के लिए अलग फीडर और पावर हाउस की व्यवस्था है, तो आखिर रातभर 10-10 मिनट में बिजली क्यों काटी जा रही है और इस समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?



