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UPI New Rules: 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर लगेगा 0.4% शुल्क, आम ग्राहकों के लिए सेवा पूरी तरह मुफ्त; जानें आदेश और तारीख


दिल्ली 15 सितंबर
देश में डिजिटल भुगतान को लेकर नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वित्त मंत्रालय ने नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क जारी किया है। नए नियमों के तहत यूपीआई (UPI) पेमेंट पर शुल्क को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है। आइए जानते हैं इस आदेश से जुड़ी हर एक बात विस्तार से: 
1. कितना शुल्क लगेगा? (Charge Details)
आम ग्राहकों के लिए: आम नागरिकों या उपभोक्ताओं (Consumers) के लिए यूपीआई पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। आप पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के यूपीआई का उपयोग कर सकेंगे। 
मर्चेंट/व्यापारियों के लिए: यदि कोई व्यक्ति किसी व्यापारी (Person-to-Merchant यानी P2M) को 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान करता है, तो उस पर 0.4% का एमडीआर (MDR – Merchant Discount Rate) शुल्क लगेगा। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा, बल्कि संबंधित मर्चेंट या दुकानदारों को देना होगा। 
बड़े लेन-देन पर कैप: 75,000 रुपये या उससे अधिक के मर्चेंट लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित (Capped) कर दिया गया है। 
विशेष श्रेणियां (Special Categories): पेट्रोल/डीजल (ईंधन), बीमा प्रीमियम (Insurance), रेलवे टिकट और सरकारी यूटिलिटी बिलों (बिजली, पानी) के 2,000 रुपये से अधिक के भुगतानों पर 0.4% की जगह 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट शुल्क लगेगा। वहीं, म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े निवेश भुगतानों पर 0.02% का शुल्क तय किया गया है।
व्यक्तिगत ट्रांसफर (P2P): एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (Family & Friends) को भेजे जाने वाले पैसे या खुद के बैंक खातों के बीच का ट्रांसफर पूरी तरह से मुफ्त रहेगा। 
2. आदेश कब जारी हुआ? (Order Date)
इस संबंध में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग और एनपीसीआई (NPCI) द्वारा आधिकारिक दिशा-निर्देश और गजट नोटिफिकेशन 14 से 15 सितंबर 2026 के बीच जारी किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2,000 रुपये तक के सभी यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं लिया जा सकता। 
3. आदेश कब से लागू होगा? (Effective Date)
यह नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क आगामी 15 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में प्रभावी  होगा। इस समय-सीमा का उद्देश्य बैंकों, फिनटेक ऐप्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स को अपने सॉफ्टवेयर और बिलिंग सिस्टम को अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय देना है। 

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