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कोरारी कलां गौशाला मामला: सचिव निलंबित, प्रधान वरुणा देवी पर कार्रवाई का इंतजार—ग्रामीणों ने उठाए सवाल

किसान मेल | उन्नाव
ब्यूरो: ऋषभ तिवारी

उन्नाव। बिछिया विकासखंड की ग्राम पंचायत कोरारी कलां स्थित अस्थायी गौशाला में मृत गोवंश खुले में मिलने के मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जिम्मेदारी तय किए जाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में ग्राम पंचायत सचिव संदीप मिश्रा को निलंबित किया जा चुका है, वहीं ग्राम प्रधान वरुणा देवी की भूमिका को लेकर ग्रामीण लगातार सवाल उठा रहे हैं।

मामला तब सामने आया जब गौशाला के आसपास खुले में कई मृत गोवंश मिलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में मृत गोवंश दिखाई देने के बाद गांव में हड़कंप मच गया और गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। ग्रामीणों ने गोवंश की संख्या, देखरेख, चारा-पानी और साफ-सफाई सहित कई बिंदुओं पर सवाल उठाए।

इसके बाद प्रशासन की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई शुरू की गई। कार्रवाई के क्रम में ग्राम पंचायत सचिव संदीप मिश्रा को निलंबित कर दिया गया। बाद में मृत गोवंश खुले में मिलने के मामले में ग्राम पंचायत प्रशासक वरुणा देवी को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की बात भी सामने आई।

हालांकि अब ग्रामीणों का सवाल है कि यदि गौशाला की व्यवस्थाओं में लापरवाही हुई थी तो जिम्मेदारी सिर्फ सचिव तक सीमित क्यों रखी गई? ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला ग्राम पंचायत की व्यवस्था का हिस्सा है और जिम्मेदारी तय करते समय ग्राम प्रधान वरुणा देवी की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

ग्रामीणों का सवाल—सिर्फ सचिव ही जिम्मेदार क्यों?

ग्रामीणों का कहना है कि सचिव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन प्रधान की भूमिका पर अभी तक वैसी कार्रवाई सामने नहीं आई है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन पूरे मामले की शुरुआत से अब तक की व्यवस्थाओं, गौशाला में मौजूद गोवंश की संख्या, चारा-पानी, साफ-सफाई और मृत गोवंश के मामले की निष्पक्ष जांच कराए।

ग्रामीणों की मांग है कि जिसकी भी लापरवाही सामने आए, उसके खिलाफ पद या प्रभाव देखे बिना कार्रवाई हो।

अब तक की कहानी

14 अगस्त: गौशाला क्षेत्र के आसपास कई मृत गोवंश का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
इसके बाद: मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी और गौशाला की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे।
प्रशासनिक कार्रवाई: ग्राम पंचायत सचिव संदीप मिश्रा को निलंबित किया गया।
इसके बाद: ग्राम पंचायत प्रशासक/प्रधान वरुणा देवी को मामले में स्पष्टीकरण देने के लिए कारण बताओ नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई।
आज ग्रामीणों की मांग: पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय करते समय प्रधान समेत सभी संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जाए।

ग्रामीणों की दो टूक

ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी को बेवजह दोषी ठहराना नहीं, बल्कि गौशाला में गोवंश की उचित देखभाल और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है। उनका कहना है कि अगर सचिव दोषी हैं तो कार्रवाई उचित है, लेकिन यदि जांच में प्रधान या किसी अन्य जिम्मेदार की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—सचिव पर कार्रवाई हो गई, लेकिन प्रधान वरुणा देवी की भूमिका की जांच का परिणाम क्या रहा?

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति पर समान कार्रवाई करने की मांग की है।

किसान मेल की नजर इस मामले पर बनी हुई है।

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