सावधान! कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सफर से पहले सोचें, करोड़ों की सड़क उद्घाटन के चंद दिनों में ही धंसने लगी; PNC के काम पर बड़े सवाल

ब्यूरो ऋषभ तिवारी
उन्नाव। जिस कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को आधुनिक सुविधाओं से लैस और तेज सफर का नया रास्ता बताया गया था, वही अब सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही समय बाद जगह-जगह सड़क धंसने, दरारें आने और पैचवर्क की जरूरत पड़ने की खबरें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल निर्माण एजेंसी PNC Infratech के काम और उसकी गुणवत्ता जांच को लेकर खड़ा हो रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक्सप्रेसवे के शुरू होने के कुछ ही दिनों में सड़क के कई हिस्सों में मरम्मत की नौबत आ गई। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार महज 26 दिनों में 74 स्थानों पर पैचवर्क किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद भी सड़क धंसने की घटनाएं थम नहीं रही हैं।
24 घंटे में फिर कई जगह सड़क धंसी
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में एक्सप्रेसवे पर 14 और स्थानों पर सड़क धंसने की जानकारी सामने आई है। पुराने पैचवर्क के भी उखड़ने की बात कही गई है। सड़क की यह स्थिति उस समय सामने आ रही है, जब एक्सप्रेसवे को शुरू हुए अभी बहुत ज्यादा समय नहीं बीता है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर निर्माण के दौरान सड़क की बेस, मिट्टी की मजबूती, जल निकासी और अन्य तकनीकी मानकों की जांच किस स्तर पर हुई? यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप था तो बारिश और यातायात का दबाव आते ही सड़क में बार-बार धंसाव क्यों सामने आ रहा है?
पंखे से पैचवर्क सुखाने का वीडियो भी चर्चा में
एक्सप्रेसवे पर पैचवर्क के दौरान पंखों से सड़क सुखाए जाने का मामला भी सामने आया है। इसको लेकर सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों तक में सवाल उठे। दैनिक जागरण ने भी इसे अपनी रिपोर्ट में प्रमुखता से उठाया है।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क की मरम्मत महज ऊपरी पैचवर्क से नहीं, बल्कि खराबी की असली वजह तलाशकर की जानी चाहिए। अगर सड़क की नीचे की परत या जल निकासी व्यवस्था में कमी है तो बार-बार ऊपर से पैच लगाने से समस्या का स्थायी समाधान कैसे होगा?
अब NHAI की कार्रवाई ने भी बढ़ाए सवाल
मामले को लेकर NHAI ने भी सख्त कदम उठाए हैं। रिपोर्टों के अनुसार PNC Infratech को नॉन-परफॉर्मिंग कॉन्ट्रैक्टर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को मरम्मत पूरी होने तक रोक दिया गया है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने और तकनीकी जांच के लिए IIT की टीम लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
यानी अब मामला केवल सड़क में गड्ढे या धंसाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था तक पहुंच चुका है।
PNC के काम पर उठ रहे ये सवाल
एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी के सामने अब कई सवाल हैं—
- इतनी कम अवधि में सड़क कई स्थानों पर क्यों धंसने लगी?
- निर्माण के दौरान मिट्टी और बेस की गुणवत्ता की जांच कितनी गंभीरता से हुई?
- जल निकासी की व्यवस्था में कहीं कमी तो नहीं रही?
- 26 दिनों में दर्जनों स्थानों पर पैचवर्क की नौबत क्यों आई?
- बार-बार मरम्मत के बावजूद सड़क में नई जगहों पर धंसाव क्यों सामने आ रहा है?
- क्या निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच पहले ही नहीं होनी चाहिए थी?
इन सवालों का जवाब तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल हालात ने एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न जरूर खड़े कर दिए हैं।
वाहन चालकों के लिए भी चेतावनी
एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार से वाहन चलते हैं। ऐसे में अचानक सड़क धंसने, पैचवर्क वाले हिस्से में ऊंच-नीच होने या सड़क की सतह खराब मिलने से हादसे का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए जब तक सभी प्रभावित हिस्सों की तकनीकी जांच और स्थायी मरम्मत पूरी नहीं होती, वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
किसान मेल न्यूज़ का सवाल:
जनता के करोड़ों रुपये खर्च करके तैयार किए गए एक्सप्रेसवे की ऐसी स्थिति आखिर क्यों बनी? अब जरूरत सिर्फ गड्ढे भरने की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की है कि निर्माण में कमी कहां हुई, निगरानी में चूक किस स्तर पर हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी।



