कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फिर उठे सवाल, एक दिन में 10 जगह धंसी सड़क; निर्माण गुणवत्ता पर बढ़ी चिंता

ब्यूरो ऋषभ तिवारी
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की घटनाएं लगातार सामने आने के बाद अब एक ही दिन में करीब 10 स्थानों पर सड़क के धंसने की जानकारी सामने आई है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
कुछ ही समय पहले शुरू हुए इस एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह सड़क में दरार, धंसाव और मरम्मत की जरूरत जैसी स्थिति सामने आने से वाहन चालकों की चिंता बढ़ गई है। महत्वपूर्ण मार्ग होने के कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क के बार-बार खराब होने से हादसे का खतरा भी बना हुआ है।

बार-बार मरम्मत के बावजूद समस्या बरकरार
एक्सप्रेसवे पर सड़क खराब होने के बाद कई स्थानों पर मरम्मत का काम कराया गया, लेकिन इसके बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म होती नजर नहीं आ रही। लगातार सामने आ रही खामियों ने निर्माण की निगरानी और इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर भी चर्चा तेज कर दी है।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि जिस एक्सप्रेसवे से तेज और सुरक्षित सफर की उम्मीद थी, वहां शुरुआत से ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना चिंता का विषय है। उनका कहना है कि केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों पर पैचवर्क कराने के बजाय समस्या की मूल वजह का पता लगाया जाना चाहिए।
निर्माण गुणवत्ता की जांच की उठ रही मांग
लगातार सड़क धंसने की घटनाओं के बीच अब एक्सप्रेसवे के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, सड़क की मोटाई, बेस और जल निकासी व्यवस्था समेत तकनीकी पहलुओं की जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण में कहीं कमी है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए इस महत्वपूर्ण मार्ग पर इतनी जल्दी सड़क धंसने की नौबत क्यों आ रही है और बार-बार मरम्मत के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पा रहा।
किसान मेल न्यूज़ के लिए सवाल:
क्या एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच होगी? अगर जांच होती है तो सड़क धंसने के पीछे जिम्मेदार कौन है—इसका जवाब सामने आना जरूरी है।



