कानपुर देहात में कागजों पर विकास, जमीन पर कीचड़दार जलभराव

दबंगई और अवैध कब्जों के आगे प्रशासन बेबस, कीचड़ भरे पानी से स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल
कानपुर देहात। सिकंदरा तहसील क्षेत्र के ग्राम पीतमपुर डेरापुर, विकासखंड राजपुर में विकास के दावों की जमीनी हकीकत ग्रामीणों की मुश्किलों को उजागर कर रही है। गांव की गलियों में जलभराव और बजबजाते कीचड़ ने ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल कर दिया है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें गंदे और बदबूदार पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में जलनिकासी की व्यवस्था लंबे समय से बदहाल है। दबंगों की कथित हठधर्मिता और अवैध कब्जों के चलते पानी की निकासी प्रभावित होने की बात भी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या आज की नहीं, बल्कि वर्षों से बनी हुई है।
20 साल में करोड़ों का फंड, फिर भी हालात जस के तस
ग्रामीणों के मुताबिक करीब दो दशक से गांव में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जाता रहा है, लेकिन इसके बावजूद जलभराव और खराब रास्तों की समस्या दूर नहीं हो सकी। सवाल उठ रहा है कि यदि इतने वर्षों में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं तो गांव की गलियों की यह हालत क्यों है?
कीचड़ भरे पानी से गुजर रहे बच्चे
गांव के स्कूली बच्चों को रोजाना इसी जलभराव से होकर विद्यालय जाना पड़ रहा है। कीचड़ और गंदे पानी में गिरने का खतरा तो है ही, साथ ही लंबे समय तक जमा पानी से संक्रमण फैलने की आशंका भी ग्रामीणों को परेशान कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों के सामने समस्या रखे जाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ।
जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
एक ओर स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों के जरिए विकास और स्वच्छता के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में बच्चों को कीचड़ और गंदे पानी से होकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और विकासखंड स्तर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच कराने, जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त कराने और यदि कहीं अवैध कब्जा है तो उसे हटवाने की मांग की है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी दफ्तरों से बाहर निकलकर पीतमपुर डेरापुर की जमीनी हकीकत देखते हैं या फिर ग्रामीणों की यह परेशानी कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाती है।
डीएम साहब, संज्ञान लीजिए—स्कूल जाने वाले नौनिहालों का कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना किसी भी सूरत में सामान्य व्यवस्था नहीं हो सकती।



