मेरठ सेंट्रल मार्केट पर सवाल सुनते ही भड़के सांसद अरुण गोविल

UP- मेरठ में BJP सांसद अरुण गोविल जी की झंडेबरदारी में BJP नेता, विधायकजी और मंत्री जी ने विशाल प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. मसला है.. सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से चले बुलडोजर का.
सांसद जी सेंट्रल करके के पीड़ितों के कष्ट हरने के लिए जबरदस्त मरहम लेकर आए है-
सेंट्रल मार्केट में जिन दुकान मालिक /किरायेदारों की दुकानें गई है, उन सबको न्यूनतम किराए पर दुकानें मिलेंगी.
सेंट्रल मार्केट में घर गंवाने वालों का पुनर्वास करके नए घर दिये जाएंगे.
किराए की दुकानें और पुनर्वास के लिए घर अगले 6 महीने में तैयार किये जायेंगे.
ठीक 6 महीने बाद से आवंटन मिलना शुरू हो जाएगा.
जिन 16744 अवैध निर्माणों को सील करके, कार्रवाई (ध्वस्तीकरण) के आदेश सुप्रीमकोर्ट ने दिए है, उस इलाके में अवैध भवनों का सर्वे फिर से कराया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से घबराई सरकार ने आज मेरठ विकास प्राधिकरण के नाकाबिल सचिव अर्पित गुप्ता को उनके पद से हटा दिया है.
इसी तरह आवास विकास के भी ढेरों अफसर, कर्मी कुछ महीनों पहले रातोंरात ताश के पत्तों की तरह बदल दिए गए थे.
अरुण गोविल सेंट्रल मार्केट के पीड़ितों को 2 बार पहले भी इसी तरह मदद का कच्चा वायदा करके बहला चुके है.
- पहली बार व्यापारियों का आंदोलन खत्म कराने के लिए कमिश्नर का “अवैध स्टे ऑर्डर” लेकर पहुंचे थे.
- दूसरी बार महिलाओं प्रदर्शनकारियों को सुप्रीमकोर्ट में “मजबूत पैरवी” के लिए बड़े वकील देने का वायदा किया था.
लेकिन पहले मामले में सरकार ने कमिश्नर को कमिश्नर हटाना पड़ गया. बाद में उन कमिश्नर साहब को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना झेलनी पड़ी थी. दूसरे मामले में पीड़ितों को कोई नामी वकील या बड़ी कानूनी मदद नहीं मिल सकी.
पूरे शहर के करीब 5 लाख अवैध निर्माणों पर बुलडोजर से ध्वस्तीकरण का साया मंडरा रहा है. दिलचस्प बात ये है कि अवैध निर्माण रोकने के लिए बने विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद इतनी फजीहत होने के बाद भी आज तक अनवरत चल रहे अवैध निर्माण नहीं रोक पा रहे है.
मेरठ में अवैध कालोनियों, कच्ची कालोनियों बसाने वाले या तो भाजपा नेता है या भाजपा नेताओं के चरण चुंबक.
यह तथ्य साक्ष्यों के आधार पर लिखे गए है.




