यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर बढ़ी हलचल, नवंबर में बदलेंगे सियासी समीकरण

25 नवंबर को खत्म हो रहा कार्यकाल, विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों से सीटों का गणित दिलचस्प; विधान परिषद की 11 सीटों पर भी होगी प्रक्रिया
ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले दो महीनों के दौरान राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। राज्यसभा की 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इसी के साथ विधान परिषद की 11 सीटों के लिए भी चुनाव और चयन की प्रक्रिया पूरी होनी है।
राज्यसभा की जिन 10 सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें वर्तमान में भाजपा की 8, सपा की 1 और बसपा की 1 सीट शामिल है। बसपा के विधानसभा में कोई विधायक नहीं होने के कारण राज्यसभा में भी पार्टी की स्थिति बदलने वाली है। ऐसे में आगामी चुनाव में विधानसभा में मौजूद दलों और सहयोगी दलों के मौजूदा संख्या बल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
भाजपा के आठ सदस्यों का कार्यकाल होगा पूरा
25 नवंबर को जिन भाजपा सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा समेत अन्य सदस्य शामिल हैं। डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी इसी अवधि तक था, लेकिन अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल नियुक्त होने के बाद उनके इस्तीफे से उनकी सीट भी रिक्त हो चुकी है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है।
397 विधायकों के मौजूदा आंकड़े से बनेगा गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक छह विधायकों के निधन के बाद वर्तमान में 397 विधायक हैं। इसी संख्या के आधार पर राज्यसभा चुनाव में एक सीट के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता मतों का गणित लगभग 37 विधायकों के आसपास बैठता है।
मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर सपा के पास 101 विधायक बताए जा रहे हैं। इस संख्या से दो राज्यसभा सीटों के लिए आवश्यक मत जुटने की स्थिति बनती है और कुछ मत अतिरिक्त बच सकते हैं।
दूसरी ओर भाजपा के पास 256 विधायक बताए जा रहे हैं। सहयोगी दलों को जोड़ने पर एनडीए का आंकड़ा करीब 289 तक पहुंचता है। निर्दलीय और अन्य समर्थक विधायकों के समर्थन को जोड़ने पर संख्या में और बदलाव संभव है।
दसवीं सीट पर दूसरी वरीयता के मत बन सकते हैं अहम
पहली वरीयता के मतों के आधार पर शुरुआती सीटों का गणित स्पष्ट होने के बाद बचने वाले मत महत्वपूर्ण हो सकते हैं। खासकर यदि किसी सीट पर अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में आता है तो दूसरी वरीयता के मतों की भूमिका बढ़ सकती है।
हालांकि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की संख्या, दलों के आधिकारिक समर्थन और चुनाव के समय विधानसभा में मौजूद वास्तविक संख्या बल पर निर्भर करेगी।
अक्टूबर में सामने आ सकता है चुनाव कार्यक्रम
राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में जारी होने की संभावना जताई जा रही है। अधिसूचना से लेकर नामांकन, नाम वापसी, मतदान और मतगणना तक की प्रक्रिया चुनाव आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार पूरी होगी।
अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों के साथ-साथ राज्य की राजनीति में भी गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं। राज्यसभा की 10 सीटों के साथ विधान परिषद की 11 सीटों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश के उच्च सदन में भी दलों की संख्या और समीकरण में बदलाव देखने को मिल सकता है।


