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पूर्व राज्यसभा सांसद और SIS ग्रुप के संस्थापक डॉ. आर. के. सिन्हा का निधन; पटना में होगा अंतिम संस्कार

2 अक्टूबर 2024 के शास्त्री जयंती पर वाराणसी के कार्यक्रम
सितंबर 2025 के देहरादून में उनके आईपीएस अकैडमी में 75वें जन्मोत्सव के अवसर पर स्वामी चक्रपाणि महाराज के साथ- की कुछ फ़ोटो
(फोटो गैलरी – आर के श्रीवास्तव)


नोएडा/पटना: 30 अक्टूबर

भारतीय राजनीति और कॉर्पोरेट जगत के प्रख्यात व्यक्तित्व, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक सदस्य, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं एसआईएस (SIS) ग्रुप के संस्थापक-चेयरमैन डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा (बड़े साहब) का नोएडा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राजनीतिक, व्यावसायिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।
बड़े साहब का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन हेतु दिल्ली से पटना स्थित उनके आवास ‘अन्नपूर्णा भवन’ (पाटलिपुत्र) लाया जाएगा। अंतिम संस्कार की विस्तृत रूपरेखा जल्द ही परिजनों द्वारा साझा की जाएगी।
डॉ. आर. के. सिन्हा का जीवन-वृत्त एवं प्रमुख उपलब्धियां
1. पत्रकारिता से सफल उद्यमी बनने का सफर
1951 में जन्मे डॉ. आर. के. सिन्हा ने अपने करियर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की थी। उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की जांबाज रिपोर्टिंग की। इसके बाद 1974 में मात्र 250 रुपये की पूंजी और एक छोटे से गैरेज से उन्होंने ‘सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज’ (SIS) की नींव रखी। आज SIS ग्रुप भारत ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया की अग्रणी सिक्योरिटी, फैसिलिटी मैनेजमेंट और कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियों में से एक है, जो लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करती है।
2. राजनीतिक योगदान और भाजपा में भूमिका
डॉ. आर. के. सिन्हा भारतीय जनता पार्टी के शुरुआती दिनों के संघर्षशील नेताओं में से एक थे और पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे। उन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2014 से 2020 तक उन्होंने बिहार से राज्यसभा सांसद के रूप में देश की सेवा की और संसद की कई महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य रहे।
3. सामाजिक सरोकार और जनकल्याण
व्यवसाय और राजनीति के अलावा, डॉ. सिन्हा सामाजिक कार्यों में सदैव अग्रणी रहे:
शिक्षा और स्वावलंबन: उन्होंने कई शैक्षणिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार और हुनर मिला।
कायस्थ समाज और गरीब वर्ग का कल्याण: वे समाज के वंचित वर्गों और अपने क्षेत्र के लोगों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत रहे।
संस्कृति एवं साहित्य: पटना का ‘अन्नपूर्णा भवन’ हमेशा सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा।
शोक की लहर
उनके निधन पर रत्ना सिन्हा, मनीष किशोर और गोपाल सिन्हा समेत परिवारजनों ने सभी प्रशंसकों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों से स्व. डॉ. सिन्हा की पुण्यात्मा की शांति हेतु प्रार्थना करने की अपील की है। देश भर के शीर्ष राजनीतिक दिग्गजों, उद्योगपतियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

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