फतेहपुर में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल: पैथोलॉजी की आड़ में डिजिटल एक्स-रे और मेडिकल स्टोर में मरीज भर्ती करने की शिकायत, आखिर कौन देगा जवाब?

ब्यूरो रिपोर्ट: ऋषभ तिवारी
फतेहपुर। जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था में नियमों का पालन हो रहा है या कथित मिलीभगत के सहारे अवैध चिकित्सा कारोबार फल-फूल रहा है? जिले में सामने आ रही शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं पैथोलॉजी सेंटर की आड़ में डिजिटल एक्स-रे संचालन की शिकायत है तो कहीं मेडिकल स्टोर के अंदर बेड डालकर मरीजों को भर्ती किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के संचालन से लेकर जिला अस्पताल में कथित वसूली तक की शिकायतें अब जांच की मांग कर रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इन शिकायतों में सच्चाई है तो संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या विभागीय निरीक्षण केवल नोटिस जारी करने तक सीमित है या नियमों का उल्लंघन करने वालों पर वास्तव में कार्रवाई भी हो रही है?
राधानगर में दो प्रतिष्ठानों को लेकर उठे सवाल
राधानगर थाने के सामने संचालित बताए जा रहे सूरज पैथोलॉजी सेंटर को लेकर शिकायत सामने आई है कि परिसर के पीछे डिजिटल एक्स-रे मशीन लगाकर जांच का काम किया जा रहा है। सवाल यह है कि संबंधित प्रतिष्ठान के पास एक्स-रे संचालन की आवश्यक अनुमति है या नहीं? मशीन के संचालन के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं? वहां योग्य एवं अधिकृत तकनीकी कर्मचारी तैनात हैं या नहीं?
इसी तरह राधानगर से बहुआ रोड पर वृंदावन गेस्ट हाउस के सामने स्थित शिवा मेडिकल स्टोर को लेकर भी शिकायत है कि दुकान के अंदर दो से तीन बेड डालकर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह जांच का विषय है कि संबंधित परिसर किस श्रेणी में पंजीकृत है और वहां मरीजों को भर्ती करने की वैध अनुमति उपलब्ध है या नहीं।
मेडिकल स्टोर में मरीज भर्ती करने की अनुमति किसने दी?
मेडिकल स्टोर का संचालन और मरीजों को भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराना दो अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। ऐसे में शिवा मेडिकल स्टोर से जुड़ी शिकायत की मौके पर जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि वहां वास्तव में मरीज भर्ती किए जा रहे हैं या नहीं। यदि मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है तो उसके लिए आवश्यक पंजीकरण, चिकित्सकीय व्यवस्था और अन्य निर्धारित मानकों की जांच होनी चाहिए।
इसी प्रकार सूरज पैथोलॉजी में डिजिटल एक्स-रे मशीन के संचालन से जुड़ी शिकायत की भी तकनीकी और दस्तावेजी जांच आवश्यक है।
जिला अस्पताल में बाहर की दवाओं और ऑपरेशन के नाम पर वसूली के आरोप
जिला अस्पताल में मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए कहने और ऑपरेशन के नाम पर कथित वसूली की शिकायतें भी समय-समय पर उठती रही हैं। सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को यदि बाहर से दवाएं खरीदने या किसी अन्य मद में अनावश्यक खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ता है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाना जरूरी है कि मरीजों से किसी प्रकार की अवैध धनराशि तो नहीं मांगी जा रही। साथ ही संबंधित अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
नोटिस के बाद फिर शुरू हो जाता है कारोबार?
निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और अन्य चिकित्सा प्रतिष्ठानों के संचालन को लेकर भी विभागीय निगरानी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में नोटिस जारी होने के बाद कुछ समय तक गतिविधियां बंद रहती हैं, लेकिन बाद में दोबारा शुरू हो जाती हैं।
यदि ऐसा है तो सवाल उठता है कि नोटिस के बाद विभाग दोबारा निरीक्षण क्यों नहीं करता? कार्रवाई की अंतिम स्थिति क्या होती है? क्या संबंधित प्रतिष्ठानों के पंजीकरण और संचालन की शर्तों का नियमित सत्यापन किया जाता है?
डीएम और सीएमओ से उठे सीधे सवाल
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा अवैध चिकित्सा प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देशों के बीच फतेहपुर की इन शिकायतों का सत्यापन जरूरी हो गया है।
जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मांग है कि सूरज पैथोलॉजी, शिवा मेडिकल स्टोर सहित शिकायतों में सामने आए अन्य प्रतिष्ठानों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। उनके पंजीकरण, एक्स-रे संचालन की अनुमति, तकनीकी कर्मचारियों की योग्यता और मरीजों को भर्ती करने से संबंधित वैधानिक दस्तावेजों की जांच की जाए।
जिला अस्पताल में बाहर की दवाओं और ऑपरेशन के नाम पर कथित वसूली की शिकायतों की भी अलग से जांच कराई जाए। यदि किसी प्रतिष्ठान में अनियमितता प्रमाणित होती है तो संचालकों के साथ-साथ संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब कार्रवाई का इंतजार, मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम आदमी की जिंदगी से जुड़ी हैं। ऐसे में चिकित्सा प्रतिष्ठानों के संचालन में नियमों की अनदेखी और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। प्रशासन को चाहिए कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे।
यदि आरोप गलत हैं तो विभाग तथ्यों और दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करे। वहीं यदि अनियमितताएं सही पाई जाती हैं तो केवल नोटिस जारी करने के बजाय नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि फतेहपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी वास्तव में कितनी मजबूत है? मरीजों की जिंदगी और उनकी जेब से जुड़े इन सवालों पर स्वास्थ्य विभाग कब जवाब देगा?



