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रुस्तम स्लॉटर हाउस पर गंभीर आरोप, मानकों की अनदेखी का दावा; जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे सवाल

संवाददाता सचिन पांडे

पशु क्रूरता से लेकर प्रदूषण और अपशिष्ट निस्तारण तक कई शिकायतें, जांच की मांग; जीएम के कथित बयान ने बढ़ाई चर्चाएं

उन्नाव। दही क्षेत्र स्थित रुस्तम स्लॉटर हाउस को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि यहां पशु वध से जुड़े निर्धारित मानकों और पशु क्रूरता से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा पशुओं को वाहनों में क्षमता से अधिक भरकर लाने, वध प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी तथा अपशिष्ट के उचित निस्तारण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की जा रही है।

शिकायतकर्ताओं की ओर से यहां तक आरोप लगाए गए हैं कि स्लॉटर हाउस में नवजात पशुओं समेत पशुओं के वध से संबंधित नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। हालांकि इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

वाहनों में क्षमता से अधिक पशु लाने का आरोप

स्लॉटर हाउस में पशुओं को लाने वाले वाहनों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि बेजुबान पशुओं को वाहनों में अत्यधिक संख्या में भरकर लाया जाता है, जिससे पशु क्रूरता से जुड़े नियमों के उल्लंघन की आशंका है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित विभाग से वाहनों की जांच और मौके पर पशुओं की स्थिति का निरीक्षण कराने की मांग की है।

प्रदूषण और जलस्रोतों को लेकर भी सवाल

रुस्तम स्लॉटर हाउस की गतिविधियों से आसपास के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। इसके साथ ही गंगा जल और आसपास के जलस्रोतों में प्रदूषण फैलने की आशंका भी जताई गई है।

अपशिष्ट निस्तारण को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि अगर पशु वध से निकलने वाले अपशिष्ट का निर्धारित मानकों के अनुसार निस्तारण नहीं किया जा रहा है तो इससे आसपास के वातावरण और जलस्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि नियमों के उल्लंघन के आरोप सही हैं तो नियमित निरीक्षण और कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है? लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मौके पर पहुंचकर पशु वध के मानकों, पशु परिवहन, प्रदूषण नियंत्रण और अपशिष्ट निस्तारण की जांच कराने की मांग की है।

जीएम के कथित बयान से बढ़ा विवाद

वहीं, शिकायतकर्ताओं की ओर से स्लॉटर हाउस के जीएम पर एक कथित बयान देने का भी आरोप लगाया गया है। दावा किया गया है कि जीएम ने कथित तौर पर कहा कि खबर चाहे जितनी प्रकाशित हो जाए, ऊपर से नीचे तक सबको ‘माल’ पहुंचता है और कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि इस कथित बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जीएम का पक्ष सामने आना बाकी है।

जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई

मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि जांच में पशु क्रूरता, पर्यावरणीय मानकों या अपशिष्ट निस्तारण से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।

अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग मौके पर पहुंचकर स्लॉटर हाउस की विस्तृत जांच करेंगे या गंभीर शिकायतें सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी? निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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