उत्तर प्रदेशकानपुरताजा खबर

महामंत्री बिनय मिश्रा के नेतृत्व में कानपुर में अधिवक्ताओं का हुंकार प्रदर्शन, मांगों को लेकर बनाई मानव श्रृंखला

कानपुर में अधिवक्ताओं का बड़ा प्रदर्शन, मानव श्रृंखला बनाकर जताया विरोध

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News

15 सूत्रीय मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर रहे अधिवक्ता, शताब्दी गेट से लॉयर्स एसोसिएशन तक बनाई मानव श्रृंखला

कानपुर। अधिवक्ताओं की लंबित मांगों को लेकर बुधवार को कानपुर कचहरी में बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। बार एसोसिएशन और लायर्स एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने सामूहिक अवकाश रखा और न्यायिक कार्य से दूरी बनाए रखी। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। शताब्दी गेट से लेकर लॉयर्स एसोसिएशन के गेट तक बनाई गई मानव श्रृंखला के जरिए अधिवक्ताओं ने एकजुटता का प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। अधिवक्ताओं का कहना था कि सितंबर में आयोजित प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में कई मांगों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तय की गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण विरोध जारी रखा गया है। इससे पहले भी अधिवक्ता प्रत्येक बुधवार न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय ले चुके हैं।

महामंत्री बिनय मिश्रा ने संभाली आंदोलन की कमान

प्रदर्शन में बार एसोसिएशन के महामंत्री बिनय कुमार मिश्रा की भूमिका प्रमुख रही। रिपोर्टों के मुताबिक मिश्रा ने अधिवक्ताओं की मांगों को लेकर संगठन की ओर से आंदोलन जारी रखने की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से अधिवक्ताओं के मुकदमों को उनके कार्यक्षेत्र से बाहर अन्य जिलों में स्थानांतरित करने के फैसले को वापस लेने की मांग उठाई। साथ ही अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को भी प्रमुखता से रखा गया।

बिनय मिश्रा के मुताबिक अधिवक्ताओं की मांगों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की पीठ की स्थापना, नए अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक सहायता तथा 70 वर्ष से अधिक उम्र के अधिवक्ताओं के लिए पेंशन जैसी मांगें भी शामिल हैं। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति संगठन स्तर पर तय की जाएगी।

सितंबर में कानपुर से शुरू हुई थी आंदोलन की रूपरेखा

अधिवक्ताओं के मौजूदा आंदोलन की पृष्ठभूमि 10 और 11 सितंबर को कानपुर में हुए दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन से जुड़ी है। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से अधिवक्ता संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 58 जिलों के अधिवक्ता संगठन के पदाधिकारियों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया था।

सम्मेलन में अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, अधिवक्ता कल्याण निधि बढ़ाने, नए अधिवक्ताओं को शुरुआती वर्षों में भत्ता देने, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन तथा न्यायालय भवनों और अधिवक्ता चेंबरों के लिए बजटीय प्रावधान समेत कई मुद्दों पर प्रस्ताव रखे गए थे।

इसके बाद मांगें पूरी होने तक प्रत्येक बुधवार न्यायिक कार्य से विरत रहने की रणनीति अपनाई गई। 30 सितंबर को इसी क्रम में सामूहिक अवकाश और मानव श्रृंखला के माध्यम से विरोध दर्ज कराया गया।

कचहरी से रजिस्ट्री कार्यालय तक पड़ा असर

अधिवक्ताओं के सामूहिक अवकाश के कारण न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ। इससे पहले के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कचहरी के साथ रजिस्ट्री कार्यालय और तहसील क्षेत्र में भी कामकाज प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी। वादकारियों को तारीख लेकर वापस लौटना पड़ा था।

अधिवक्ताओं के आंदोलन का असर केवल कानपुर तक सीमित रखने के बजाय इसे प्रदेश स्तर पर आगे बढ़ाने की रणनीति भी सम्मेलन में सामने आई थी। बार एसोसिएशन और लायर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

लोक अदालत के बहिष्कार से भी जुड़ा आंदोलन

इसी आंदोलन के तहत 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार का भी आह्वान किया गया था। उस दिन बार एसोसिएशन के महामंत्री बिनय मिश्रा और लायर्स एसोसिएशन के महामंत्री राजीव यादव के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का समूह न्यायालय भवन पहुंचा था। वहां काम कर रहे कुछ अधिवक्ताओं से लोक अदालत की कार्यवाही से अलग रहने की अपील की गई थी। इस दौरान कुछ अधिवक्ताओं के बीच नोकझोंक की स्थिति भी बनी थी।

फिलहाल 30 सितंबर के प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने साफ किया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन के अगले चरण को लेकर संगठन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। बुधवार का प्रदर्शन इसी क्रम में अधिवक्ताओं की एकजुटता और उनकी लंबित मांगों को सामने रखने का माध्यम रहा।

Related Articles

Back to top button