फर्जी स्टाफ नर्स प्रकरण में आउटसोर्सिंग फर्म ने झाड़ा पल्ला, 12.99 लाख रुपये की वसूली का मामला फिर अटका

जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। जिला महिला चिकित्सालय में फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाली स्टाफ नर्स के मामले में नया मोड़ सामने आया है। संबंधित आउटसोर्सिंग फर्म ने नर्स की नियुक्ति और दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है। फर्म का कहना है कि स्टाफ नर्स की नियुक्ति वर्ष 2020 में उसके जिम्मेदारी संभालने से पहले ही सीएमओ स्तर से की गई थी।
जानकारी के अनुसार, सपना अग्रवाल की नियुक्ति वर्ष 2020 में जिला महिला अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद पर हुई थी। मार्च 2026 में शिकायत मिलने के बाद कार्यवाहक सीएमएस डॉ. अरविंद आनंद ने उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों और नर्सिंग काउंसिल के पंजीकरण की जांच कराई। जांच में पंजीकरण फर्जी पाया गया। इसके बाद आठ अप्रैल 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।
जिला स्वास्थ्य समिति ने वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक दिए गए 12.99 लाख रुपये के मानदेय की वसूली और प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मामले में कार्रवाई लंबित रही।
सीएमओ कार्यालय ने 11 सितंबर को लखनऊ की आउटसोर्सिंग फर्म मेसर्स आशीष एंटरप्राइजेज को पत्र भेजकर कार्रवाई करने को कहा था। फर्म के प्रोपराइटर ने 30 अक्टूबर को जवाब देते हुए कहा कि संबंधित नर्स की नियुक्ति फर्म को ठेका मिलने से पहले जिला स्तर पर हुई थी। इसलिए दस्तावेजों के सत्यापन और नियुक्ति की जिम्मेदारी फर्म की नहीं है।
फर्म के जवाब के बाद सीएमएस ने दो नवंबर को सीडीओ कृतिराज को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। सीडीओ ने बताया कि पत्र प्राप्त होने और जानकारी मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना होगा कि सरकारी धन की वसूली और प्राथमिकी के मामले में स्वास्थ्य विभाग कब तक ठोस कदम उठाता है।



