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गंगा एक्सप्रेसवे के पैचवर्क में फिर आई दरारें, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

बारिश के बाद पहले धंसाव, कटाव और गड्ढे की समस्या आई, मरम्मत के बाद उसी हिस्से में दोबारा दिखीं दरारें; उन्नाव में एक्सप्रेसवे की मजबूती और ड्रेनेज व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

— ऋषभ तिवारी, ब्यूरो चीफ
दैनिक किसान मेल न्यूज़

उन्नाव। प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद समस्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उन्नाव जिले में पहले सड़क के आसपास मिट्टी धंसने, कटाव और बड़े गड्ढे बनने की समस्या सामने आई। संबंधित एजेंसियों ने क्षतिग्रस्त हिस्सों में मरम्मत और पैचवर्क कराया, लेकिन अब मरम्मत किए गए हिस्से में ही दोबारा दरारें दिखाई देने लगी हैं। ताजा तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद एक्सप्रेसवे की मजबूती, मरम्मत की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

बारिश के बाद शुरू हुई थी परेशानी

गंगा एक्सप्रेसवे पर उन्नाव के हिस्से में लगातार बारिश के बाद सड़क और उसके आसपास के एम्बैंकमेंट में परेशानी सामने आई। पानी के बहाव के कारण कई स्थानों पर मिट्टी के कटाव और धंसाव की स्थिति बनी। इसके बाद संबंधित कार्यदायी संस्था और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) की टीम ने प्रभावित स्थानों पर मरम्मत का काम शुरू कराया।

इसी दौरान एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क की स्थिति को लेकर लगातार शिकायतें और तस्वीरें सामने आती रहीं।

किलोमीटर 421 के आसपास बना था बड़ा गड्ढा

बारिश के दौरान गंगा एक्सप्रेसवे के मेरठ-प्रयागराज कैरिजवे पर किलोमीटर 421 के आसपास सड़क और उसके किनारे का एम्बैंकमेंट क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्टों के मुताबिक यहां बारिश के पानी के बहाव से सड़क के पास बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ और करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बनने की बात सामने आई।

मामले की जानकारी मिलने के बाद UPEIDA की टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत शुरू कराई गई।

मरम्मत के बाद फिर उसी हिस्से में दरार

सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि जिस हिस्से में नुकसान के बाद पैचवर्क कराया गया था, उसी मरम्मत वाले हिस्से में दोबारा दरारें क्यों दिखाई देने लगीं।

27 अगस्त को सामने आई ताजा तस्वीरों और रिपोर्टों के अनुसार उन्नाव के आसपास पैचवर्क किए गए हिस्से में फिर दरारें दिखाई दीं। इससे सड़क की टिकाऊपन और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

हालांकि निर्माण एजेंसी की ओर से इसे सुधारात्मक कार्यों और रूटीन पैचवर्क का हिस्सा बताया गया है। गंगा एक्सप्रेसवे की उन्नाव क्षेत्र की निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर आरके मिश्र के अनुसार मार्ग पर सुधारात्मक कार्य किए जा चुके हैं और यातायात सुचारु है।

पहले भी सोनिक टोल प्लाजा की एप्रोच रोड हुई थी क्षतिग्रस्त

यह पहली बार नहीं है जब उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ी सड़क को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले जुलाई में सोनिक टोल प्लाजा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली करीब सात मीटर लंबी एप्रोच रोड भारी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हुई थी।

यहां एम्बैंकमेंट की मिट्टी में कटाव हुआ और सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। इसके बाद मरम्मत कार्य कराया गया था।

किमी 420 से 422 के बीच भी आई थी समस्या

इससे पहले उन्नाव के किमी 420 से 422 के बीच नहर पुल के पास सड़क के जोड़ में दरार आने की जानकारी सामने आई थी। इसी दौरान तीन स्थानों पर मिट्टी धंसने की समस्या भी बताई गई थी। कार्यदायी संस्था ने इन हिस्सों में मरम्मत कराई थी।

सोनिक क्षेत्र में सुरक्षात्मक दीवार टूटने की बात भी सामने आई थी। दीवार टूटने के बाद मवेशियों के एक्सप्रेसवे के ढलान वाले हिस्से तक पहुंचने की आशंका जताई गई थी। ढलान की मिट्टी को कटाव से बचाने के लिए लगाई गई घास को मवेशियों द्वारा चरने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई थी।

पानी की निकासी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

बारिश के बाद बार-बार मिट्टी के कटाव और सड़क के धंसने की घटनाओं के बीच एक्सप्रेसवे की ड्रेनेज व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है।

विशेषज्ञ जांच के बिना दरारों का एकमात्र कारण तय नहीं किया जा सकता, लेकिन लगातार बारिश के पानी का बहाव, एम्बैंकमेंट का कटाव और सड़क के नीचे की मिट्टी की स्थिति ऐसे पहलू हैं जिनकी तकनीकी जांच जरूरी हो सकती है।

सड़क के सिर्फ ऊपरी हिस्से पर पैचवर्क करने के बजाय प्रभावित स्थान पर बेस, एम्बैंकमेंट और पानी की निकासी की स्थिति की भी जांच की जाए तो समस्या की वास्तविक वजह सामने आने में मदद मिल सकती है।

36,230 करोड़ रुपये की परियोजना पर उठे सवाल

गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल है। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक जाता है और इसकी परियोजना लागत करीब 36,230 करोड़ रुपये बताई गई है।

एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को हुआ था। इतने बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर यातायात शुरू होने के कुछ ही समय बाद बारिश के दौरान अलग-अलग हिस्सों में धंसाव, कटाव और दरारों की खबरें सामने आने से इसकी मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर चर्चा तेज हो गई है।

वाहन चालकों की सुरक्षा सबसे अहम

गंगा एक्सप्रेसवे पर बड़ी संख्या में वाहन तेज रफ्तार से चलते हैं। ऐसे में सड़क की सतह पर दोबारा दरारें या धंसाव सामने आना वाहन चालकों के लिए चिंता का विषय है।

हालांकि फिलहाल संबंधित एजेंसी की ओर से यातायात सुचारु होने की बात कही गई है, लेकिन बारिश के मौसम में प्रभावित हिस्सों की लगातार निगरानी और समय रहते स्थायी मरम्मत जरूरी है।

अब तकनीकी जांच की जरूरत

बार-बार मरम्मत के बाद उसी क्षेत्र में समस्या सामने आने से अब सिर्फ पैचवर्क करने के बजाय तकनीकी स्तर पर जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। जांच में सड़क की ऊपरी परत के साथ-साथ नीचे के बेस, एम्बैंकमेंट की मजबूती, मिट्टी के कटाव और ड्रेनेज सिस्टम की स्थिति को शामिल किया जाना चाहिए।

यदि समस्या का मूल कारण दूर किए बिना केवल ऊपरी सतह की मरम्मत होती रही तो बारिश के दौरान दोबारा नुकसान की आशंका बनी रह सकती है।

सवाल जो अब भी खड़े हैं

  • मरम्मत किए गए हिस्से में दोबारा दरारें क्यों आईं?
  • क्या पैचवर्क के साथ सड़क के नीचे के बेस की भी जांच हुई?
  • बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
  • एम्बैंकमेंट में बार-बार कटाव और धंसाव की वजह क्या है?
  • क्या प्रभावित हिस्सों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाएगी?
  • वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी कैसे होगी?

फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे पर दोबारा सामने आई दरारों ने निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था इन समस्याओं का स्थायी समाधान करती है या बारिश के बाद फिर पैचवर्क तक ही कार्रवाई सीमित रहती है।

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