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शुक्लागंज में मटन के नाम पर कथित मिलावट का आरोप, खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की मांग

संवाददाता सचिन पांडे

बकरे के मांस के नाम पर दूसरे मांस की बिक्री का आरोप, वैज्ञानिक जांच से ही खुलेगा सच

उन्नाव/शुक्लागंज। मुनाफे के लिए मांस से तैयार खाद्य पदार्थों में कथित मिलावट किए जाने की शिकायतों ने शुक्लागंज क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ दुकानों और खाद्य प्रतिष्ठानों पर बकरे के मांस से तैयार व्यंजन बताकर दूसरे पशु का मांस ग्राहकों को परोसे जाने की आशंका है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, मटन करी, कोरमा, कीमा, बिरयानी, कबाब, कलेजी, सींक बोटी और मटन स्टू समेत कई व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले मांस के स्रोत और गुणवत्ता की जांच की जरूरत है। आरोप है कि जहां ग्राहकों से बकरे के मांस की कीमत वसूली जाती है, वहीं उन्हें दूसरे पशु का मांस दिए जाने की आशंका बनी हुई है।

जांच के बिना आरोपों की पुष्टि मुश्किल

हालांकि, केवल शिकायत या स्थानीय लोगों के आरोपों के आधार पर किसी प्रतिष्ठान को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मांस किस पशु का है, इसकी पुष्टि वैज्ञानिक परीक्षण और अधिकृत प्रयोगशाला जांच से ही संभव है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित विभाग द्वारा संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाने और उन्हें प्रयोगशाला भेजे जाने की जरूरत है।

मांस की खरीद और स्रोत की भी हो जांच

स्थानीय लोगों की मांग है कि खाद्य सुरक्षा विभाग शुक्लागंज क्षेत्र में मांस और उससे तैयार खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों की जांच करे। जांच के दौरान खाद्य लाइसेंस, स्वच्छता व्यवस्था, मांस की खरीद का स्रोत, संबंधित रिकॉर्ड और खाद्य सुरक्षा मानकों का भी सत्यापन किया जाए।

यदि जांच में किसी प्रतिष्ठान पर बकरे के मांस के नाम पर दूसरे पशु का मांस बेचने या खाद्य मानकों का उल्लंघन करने की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब जांच से सामने आएगा सच

मामले ने खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता नमूना जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में अब जरूरी है कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग मौके पर जांच करे और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करे, ताकि ग्राहकों के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी की गुंजाइश न रहे।

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