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एससी-एसटी मामलों में दिए गए ₹11.43 करोड़ के मुआवजे की जांच की आंच, हाईकोर्ट के आदेश से विभाग सतर्क

झांसी। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पीड़ितों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता अब जांच के दायरे में आ सकती है। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार को इस योजना के तहत दी गई आर्थिक सहायता और मुआवजा राशि की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद झांसी में भी समाज कल्याण विभाग के स्तर पर दिए गए मुआवजे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता संतोष कुमार दोहरे और उनके परिवार के सदस्यों को अलग-अलग आपराधिक मामलों में 23 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दिए जाने का मामला सामने आया। बताया गया कि परिवार से जुड़े करीब 10 से 12 अन्य प्रकरण जिला स्तरीय समिति के समक्ष विचाराधीन हैं। इसी मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने प्रदेशभर में योजना के तहत दी गई आर्थिक सहायता की जांच के निर्देश दिए हैं।

साढ़े चार साल में 1333 मामलों में मिली सहायता

झांसी जिले में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब साढ़े चार वर्ष की अवधि में हत्या, दुष्कर्म और अन्य मामलों को मिलाकर 1333 प्रकरणों में कुल ₹1142.63 लाख यानी करीब ₹11.43 करोड़ की आर्थिक सहायता दी गई है।

वर्ष 2021-22 में हत्या के 8, दुष्कर्म के 28 और 202 अन्य मामलों में कुल ₹217.63 लाख की सहायता दी गई। वर्ष 2022-23 में हत्या के 10, दुष्कर्म के 26 और अपमान-अभित्रास समेत 311 अन्य मामलों में ₹300 लाख का भुगतान किया गया।

वर्ष 2023-24 में हत्या के 2, दुष्कर्म के 28 और 308 अन्य मामलों में ₹185 लाख की आर्थिक सहायता दी गई। वर्ष 2024-25 में हत्या के 10, दुष्कर्म के 38 और 212 अन्य मामलों में ₹267 लाख दिए गए।

वहीं वर्ष 2025-26 में अब तक हत्या के 3, दुष्कर्म के 31 और 116 अन्य मामलों में ₹173 लाख की सहायता दी जा चुकी है।

नियमों के तहत चरणबद्ध भुगतान का प्रावधान

एससी-एसटी अत्याचार निवारण योजना के तहत अलग-अलग अपराधों में आर्थिक सहायता दिए जाने की प्रक्रिया निर्धारित है। हत्या के मामलों में मुकदमा दर्ज होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद सहायता की पहली किस्त तथा चार्जशीट दाखिल होने पर दूसरी किस्त दिए जाने का प्रावधान है।

दुष्कर्म के मामलों में भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता दी जाती है। सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में सहायता की राशि अलग निर्धारित है।

जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति

जिले में दुष्कर्म समेत अन्य अपराधों के मामलों में दी गई सहायता की संख्या को देखते हुए हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब रिकॉर्ड के सत्यापन पर नजर रहेगी। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि सभी प्रकरणों में आर्थिक सहायता नियमों और पात्रता के आधार पर ही दी गई या नहीं।

समाज कल्याण अधिकारी सृष्टि अवस्थी ने कहा कि प्रथम दृष्टया एक ही परिवार द्वारा बार-बार मुआवजा लेने जैसा कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि शासन या विभाग की ओर से जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उनका नियमानुसार पालन किया जाएगा।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब शासन स्तर से होने वाली जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मुआवजा वितरण में कहीं कोई अनियमितता हुई है या सभी भुगतान निर्धारित नियमों के अनुसार किए गए हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News

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