योग गुरु बाबा रामदेव ने शिक्षा और भर्ती संबंधी मुद्दों पर युवाओं के बढ़ते असंतोष पर चिंता व्यक्त की

छात्रों और युवाओं के आंदोलन के बाद अब बाबा रामदेव भी नयी भूमिका की तलाश में जुट गये हैंपर योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा- “इस देश में न तो हिंदू खतरे में हैं, और न ही मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन या बौद्ध. न ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, दलित, आदिवासी, वनवासी, और न ही SC और ST खतरे में हैं. असल में जो चीज खतरे में है, वह है देश का बचपन, युवा पीढ़ी, वर्तमान और भविष्य; साथ ही देश की प्रकृति, संस्कृति, सभ्यता, अखंडता और संप्रभुता. इसलिए, अगर मैं अभी देश के सबसे बड़े मुद्दे की बात करूँ, तो वह है देश के बचपन को कैसे बचाया जाए.”
छात्रा विरोध पर योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा- “इस देश में न तो हिंदू खतरे में हैं, और न ही मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन या बौद्ध. न ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, दलित, आदिवासी, वनवासी, और न ही SC और ST खतरे में हैं. असल में जो चीज खतरे में है, वह है देश का बचपन, युवा पीढ़ी, वर्तमान और भविष्य; साथ ही देश की प्रकृति, संस्कृति, सभ्यता, अखंडता और संप्रभुता. इसलिए, अगर मैं अभी देश के सबसे बड़े मुद्दे की बात करूँ, तो वह है देश के बचपन को कैसे बचाया जाए.” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक हो जाते हैं और बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों द्वारा प्राप्त अंक बेकार हो जाते हैं।

बाबा रामदेव ने इससे पहले स्वतंत्रता दिवस पर कहा था कि “देश में घपले भी बहुत हैं… इसे ठीक कर लो… कहीं ऐसा न कि बाबा रामदेव को दोबारा आंदोलन करना पड़े.”
साफ है कि बाबा बदले माहौल में अपनी नयी भूमिका तय करने की जद्दोजहद में हैं. लगता है बाबा बॉल वहां सेट करना चाह रहे हैं जहां से दोनों तरफ़ खेला जा सके.
‘कोई बात है’ जो बनी तो सरकार के पक्ष में नहीं तो विपक्ष में !!




