उत्तर प्रदेश सरकार का सख्त निर्देश: न्यायालय में पेश होने वाले अधिकारियों के लिए ड्रेस कोड और ब्लू इंक का नियम अनिवार्य।
लखनऊ, 11 सितंबर ।
उत्तर प्रदेश में न्यायालय की गरिमा और अदालती कार्यवाही के प्रोटोकॉल को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद शासन के नियुक्ति एवं न्याय विभाग द्वारा यह कदम उठाया गया है।
नए नियमों के तहत अब अदालत में व्यक्तिगत रूप से (चाहे भौतिक रूप से या वर्चुअल माध्यम से) पेश होने वाले सभी अधिकारियों को शालीन और मर्यादित औपचारिक ड्रेस कोड का कड़ाई से पालन करना होगा।
अधिकारियों के लिए मुख्य दिशा-निर्देश:
ड्रेस कोड और शालीनता: अदालत में पेशी के दौरान भड़कीले कपड़े पहनने, या सनग्लासेज (रंगीन चश्मे) का उपयोग करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
शपथ पत्र की फोटो: मामलों में दाखिल किए जाने वाले शपथ पत्रों (Affidavits) पर लगने वाली अधिकारियों की तस्वीरें बिल्कुल हाल की, शालीन और औपचारिक परिधानों में होनी चाहिए।
केवल नीली स्याही का प्रयोग: अब शपथ पत्रों पर हस्ताक्षर, शपथ आयुक्त (Oath Commissioner) या नोटरी की मुहर और दस्तखत केवल नीली स्याही (Blue Ink) से ही किए जाएंगे। अन्य किसी भी रंग की स्याही या मुहर के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है।
शासन ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, पुलिस आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर इन सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।



