उन्नाव बनेगा स्वतंत्रता संग्राम सर्किट का हिस्सा, बदरका में संवर रही अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की विरासत

जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। जिले के बदरका गांव में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की विरासत को संवारने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से यहां बहुद्देशीय परिसर का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना का 75 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है और इसे नवंबर तक पूरा किए जाने की उम्मीद है।
सरकार की योजना बदरका को प्रदेश के प्रमुख पर्यटन और विरासत स्थलों में विकसित करने की है। इसके जरिए उन्नाव को स्वतंत्रता संग्राम सर्किट से जोड़ने और आजाद के जीवन, संघर्ष और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की तैयारी है।
450 लोगों की क्षमता वाला बहुद्देशीय हॉल होगा तैयार
बदरका में बन रहे बहुद्देशीय परिसर में करीब 450 लोगों की क्षमता वाला हॉल विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा परिसर में लाइब्रेरी, महिला और पुरुष ग्रीन रूम, शौचालय तथा स्टाफ रूम जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
निर्माण कार्य के तहत परिसर में सीसी रोड और इंटरलॉकिंग का काम भी कराया जा रहा है। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था की जा रही है, जिससे बारिश के पानी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।
भूतल और प्रथम तल पर तेजी से चल रहा निर्माण
परिसर के मुख्य हॉल के स्लैब समेत भूतल और प्रथम तल पर निर्माण कार्य तेजी से जारी है। अधिकारियों की निगरानी में परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
परियोजना पूरी होने के बाद यहां स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कार्यक्रमों, सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य आयोजनों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
बदरका से जुड़ा है चंद्रशेखर आजाद का पारिवारिक इतिहास
अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के पिता सीताराम तिवारी मूल रूप से उन्नाव के बदरका गांव के रहने वाले थे। यही वजह है कि बदरका का संबंध आजाद के जीवन और उनके पारिवारिक इतिहास से महत्वपूर्ण रूप से जुड़ा हुआ है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा है कि चंद्रशेखर आजाद के जीवन, संघर्ष और बलिदान से नई पीढ़ी को जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। बदरका को ऐसा विरासत स्थल बनाने की तैयारी है, जहां आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को करीब से समझ सकें।
इतिहास और युवा पीढ़ी के बीच बनेगा मजबूत सेतु
सरकार की योजना बदरका को पर्यटन के नक्शे पर प्रमुख स्थान दिलाने की है। बहुद्देशीय परिसर और अन्य विकास कार्य पूरे होने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
इस परियोजना को उन्नाव की ऐतिहासिक पहचान मजबूत करने और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



