सरकारी रिकॉर्ड में पिता को मृत दिखाकर बेटे पर नौकरी पाने का आरोप, 24 साल बाद खुला मामला

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News
उन्नाव। असोहा क्षेत्र से आश्रित कोटे में शिक्षक की नौकरी हासिल करने से जुड़ा करीब 24 साल पुराना मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक शिक्षक ने वर्ष 2002 में अपने जीवित पिता को सरकारी अभिलेखों में मृत दिखाकर आश्रित कोटे से नौकरी हासिल की।
शिकायत के अनुसार मंझरिया निवासी श्रीराम यादव असोहा क्षेत्र के नीमटीकर प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। वर्ष 2002 में वह परिवार के साथ लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र के कोराना गांव में रहने लगे। इसी दौरान उनके छोटे बेटे रामबरन यादव ने पिता को मृत दिखाकर आश्रित कोटे से शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली।
बाद में उनका तबादला असोहा से हिलौली ब्लॉक में हो गया। वह मोहनखेड़ा प्राथमिक विद्यालय में लंबे समय तक कार्यरत रहे और वर्तमान में खेरवा उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनाती बताई गई है।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब वर्ष 2014-15 में श्रीराम यादव के नाम जमीन का बैनामा हुआ। इससे उनके जीवित होने की जानकारी सामने आई।
शिकायतकर्ता ने सेवा पुस्तिका में दर्ज हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान का जमीन के बैनामे में दर्ज विवरण से मिलान कराने की मांग की है। बीईओ ने बताया कि सेवा पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। बीएसए ने मामला संज्ञान में होने और जांच कराए जाने की बात कही है।



