लखनऊ

जातीय समीकरण नहीं, युवाओं के भविष्य और नीतियों पर हो राजनीति: डॉ. राजेश्वर सिंह


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-AI से अंतरिक्ष तक बढ़ रहा भारत, राजनीति भी युवाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप हो: डॉ. राजेश्वर सिंह

-शिक्षा, कौशल, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर हो बहस, जातीय गणित पर नहीं: डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ: सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी और विपक्षी राजनीति में जातीय समीकरणों के बढ़ते संदर्भों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 21वीं सदी के भारत की राजनीतिक बहस युवाओं के भविष्य, तकनीकी प्रगति, शिक्षा, रोजगार और आर्थिक विकास के ठोस एजेंडे पर केंद्रित होनी चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि जब दुनिया Artificial Intelligence, Robotics, Semiconductors, Quantum Computing, Cyber Security और Space Technology जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही है, तब राजनीति का विमर्श भी भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं को केवल जातीय पहचान और चुनावी समीकरणों तक सीमित करना उनके भविष्य के साथ न्याय नहीं है।

समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि राजनीतिक दलों को युवाओं के सामने अपनी आर्थिक दृष्टि, शिक्षा नीति, रोजगार सृजन, कौशल विकास, निवेश, उद्योग और सामाजिक न्याय की ठोस नीतियां रखनी चाहिए। चुनावी बहस इस बात पर होनी चाहिए कि उत्तर प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मजबूत होगी, युवाओं को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण कैसे मिलेगा, रोजगार के नए अवसर कैसे पैदा होंगे, निवेश और उद्योग कैसे आएंगे तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक कैसे ले जाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ प्रत्येक युवा को सम्मान, अवसर और आगे बढ़ने का समान अधिकार देना है। युवाओं की पहचान को केवल चुनावी गणित तक सीमित करने के बजाय उन्हें डिजिटल शिक्षा, आधुनिक कौशल, उद्यमिता, रोजगार और नवाचार के अवसरों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत का युवा आज Artificial Intelligence से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक दुनिया को नेतृत्व देने की क्षमता रखता है। देश के युवा नई तकनीक विकसित करें, वैश्विक स्तर पर नवाचार करें, अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां छुएं और भारत को ज्ञान एवं तकनीक की महाशक्ति बनाने में योगदान दें, यही 21वीं सदी के भारत की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को जातीय खांचों में बांधने वाली राजनीति नहीं, बल्कि उन्हें अवसरों और आकांक्षाओं के नए क्षितिज से जोड़ने वाली राजनीति चाहिए। राजनीतिक दलों को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे शिक्षा, रोजगार, निवेश, उद्योग और आर्थिक विकास के क्षेत्र में क्या ठोस कार्ययोजना लेकर आ रहे हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने विपक्षी दलों से आह्वान किया कि वे जातीय समीकरणों से आगे बढ़कर अपनी नीतियों, विकास दृष्टि और युवाओं के भविष्य की स्पष्ट कार्ययोजना पर चुनावी बहस करें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा विचारों और नीतियों के आधार पर होनी चाहिए, ताकि उत्तर प्रदेश का युवा जातीय राजनीति में उलझने के बजाय विकास, अवसर और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ सके।

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