
पहली पत्रकार – मैं नेहा बोरा के डिटेन करने की विडियो शूट कर रही रही थी तभी वहां पर ए सी पी विवेक भगत आते हैं उनके साथ महिला पुलिस नहीं थी, वो मुझे डिटेन करने के लिए पकड़ते हैं उनका हाथ मेरे ब्रेस्ट पर था, दबाते हुए मुस्कुरा कर आगे बढ़ जाते हैं.
दूसरी पत्रकार – मैं योगेन्द्र यादव को डिटेन करने की विडियो शूट कर रही थी तभी एक पुलिस वाला आता है और अपना पेनीस मेरे बैक साइड में रगड़ रहा था, फ़िर जैसे मुड़ती हूं तो पुलिस वाला खड़ा था. फ़िर वह मेरी जांघों पर रगड़ता है. मैं छटक कर उससे सवाल करतीं हूं तो वह मुकर जाता है और वहां से भाग जाता है.
चित्र दिल्ली पुलिस के जालिमाना हरकत की कहानी बयां कर रहे हैं…

यह है दिल्ली पुलिस का ACP विवेक भगत इस पर कल जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगा है।
पत्रकार भोर तक संसद मार्ग थाने को घेरे रहे लेकिन महिला की एफआईआर दर्ज नहीं की गई। कॉकरोच सौरभ दास के अनुसार, इस अफसर पर पहले भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं, लेकिन इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी दिल्ली में सरकार बैठती है। सरकार बहादुर मोदी बैठते हैं जिनके जिगरी यार अमित शाह इस दिल्ली पुलिस के राजनीतिक प्रधान हैं। दोनों नारी वंदना के गीत गाते नहीं थकते हैं, लेकिन विवेक गुप्ता जैसों को पालकर रखते हैं।



