सचिव निलंबित, अब प्रधान की भूमिका पर उठे सवाल; कोरारी कलां गौशाला का पूरा हिसाब मांग रहे ग्रामीण

रिपोर्ट: ऋषभ तिवारी
ब्यूरो चीफ, दैनिक किसान मेल न्यूज़
उन्नाव। कोरारी कलां की अस्थायी गौशाला के आसपास मृत गोवंश मिलने के मामले में ग्राम पंचायत सचिव संदीप मिश्रा के निलंबन के बाद अब ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान की भूमिका और गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। मामले में प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायत कोरारी कलां की प्रशासक वरुणा देवी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल सचिव के निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि गौशाला के संचालन, गोवंशों की संख्या, टैगिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और मृत गोवंशों के निस्तारण की पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
105 गोवंश दर्ज, फिर मृत गोवंश किसका?
कोरारी कलां स्थित गौशाला में करीब 105 गोवंश पंजीकृत बताए गए हैं। ऐसे में ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि गौशाला के आसपास मृत मिला गोवंश आखिर किसका था?
यदि मृत गोवंश गौशाला का नहीं था तो वह गौशाला के आसपास कैसे पहुंचा? और यदि वह गौशाला में संरक्षित गोवंश था तो उसके टैग नंबर, रिकॉर्ड और मृत्यु से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं आई?
टैगिंग और रिकॉर्ड की भी हो जांच
मामले में गोवंशों की टैगिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि गौशाला के रजिस्टर, गोवंशों के टैग नंबर और टैगिंग की तारीख की जांच कराई जाए।
जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाए कि गौशाला में कितने गोवंश दर्ज थे, मौके पर कितने पाए गए और मृत गोवंश का रिकॉर्ड गौशाला के अभिलेखों में दर्ज था या नहीं।
सचिव पर कार्रवाई के बाद प्रधान की भूमिका भी जांच के दायरे में आए
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गौशाला की देखरेख अथवा मृत गोवंशों के निस्तारण में लापरवाही सामने आई है तो जिम्मेदारी केवल ग्राम पंचायत सचिव तक सीमित नहीं होनी चाहिए। गौशाला की निगरानी और व्यवस्थाओं से जुड़े सभी जिम्मेदारों की भूमिका जांची जानी चाहिए।
गौशाला में चारा-पानी, साफ-सफाई, गोवंशों की संख्या, टैगिंग, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और मृत गोवंशों के नियमानुसार निस्तारण की व्यवस्था की भी जांच होनी चाहिए।
प्रशासन ने मांगा स्पष्टीकरण
मृत गोवंश मिलने के मामले में प्रशासन ने जांच के बाद ग्राम पंचायत कोरारी कलां की प्रशासक वरुणा देवी को उत्तर प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में सरकारी कार्यों के निर्वहन में कथित उदासीनता और गौशाला में संरक्षित गोवंशों की उचित देखरेख को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
प्रशासन ने संबंधित पक्ष से 15 दिन के भीतर लिखित जवाब मांगा है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि जांच में गौशाला से जुड़े सभी तथ्यों और जिम्मेदारियों की तस्वीर कितनी साफ होती है।
ग्रामीणों की मांग—कागज नहीं, मौके की जांच हो
ग्रामीणों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति दोनों के आधार पर होनी चाहिए। गौशाला के रजिस्टर, टैगिंग रिकॉर्ड, गोवंशों की वास्तविक संख्या और मृत गोवंश के निस्तारण से जुड़े दस्तावेजों की जांच होने पर ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
ग्रामीणों की मांग है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाए और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो जांच के बाद स्थिति भी स्पष्ट की जाए।
अब सवाल यही है—105 गोवंशों के रिकॉर्ड और गौशाला के आसपास मिले मृत गोवंश के बीच पूरी सच्चाई क्या है? इसका जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।



