17 साल से एक ही सीट पर ‘बाबू’, किसके संरक्षण में चल रहा उपनिबंधन कार्यालय का खेल?

ब्यूरो ऋषभ तिवारी
वायरल वीडियो के बाद भी कार्रवाई पर सवाल, खागा में रिश्वत लेते बाबू की गिरफ्तारी के बाद फतेहपुर सदर कार्यालय भी जांच के घेरे में
फतेहपुर। पुरानी तहसील परिसर स्थित उपनिबंधन कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर इन दिनों कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कार्यालय में तैनात एक बाबू के करीब 17 वर्षों से एक ही महत्वपूर्ण सीट पर जमे रहने की चर्चा है। हालांकि, किसान मेल इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
मामला सिर्फ किसी कर्मचारी की लंबी तैनाती तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि यदि किसी कर्मचारी की इतने लंबे समय तक एक ही पटल पर तैनाती रही है तो क्या समय-समय पर विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा की गई? क्या पटल परिवर्तन और स्थानांतरण संबंधी नियमों का पालन हुआ? इन सवालों पर विभागीय अधिकारियों की स्पष्ट स्थिति सामने आना बाकी है।
लंबे समय से ‘सिस्टम’ की चर्चाएं
सूत्रों के हवाले से उपनिबंधन कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं। आरोप लगाए जाते हैं कि रजिस्ट्री और दस्तावेज संबंधी काम कराने के दौरान लोगों को कई स्तरों से गुजरना पड़ता है और कार्यालय के अंदर-बाहर सक्रिय कुछ लोगों का प्रभाव रहता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित कर्मचारी का पक्ष इस खबर के प्रकाशन तक सामने आया है। ऐसे में आरोपों की वास्तविकता जांच का विषय है।
वायरल वीडियो के बाद कार्रवाई पर सवाल
कुछ समय पहले उपनिबंधन कार्यालय से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की चर्चा भी सामने आई थी। वीडियो में लगाए गए आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसके बावजूद सवाल उठ रहा है कि यदि वीडियो अधिकारियों के संज्ञान में आया था तो क्या उसकी जांच कराई गई? क्या संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ हुई? क्या विभागीय स्तर पर कोई जांच समिति गठित की गई? यदि वीडियो में लगाए गए आरोप निराधार थे तो विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई?
वहीं, यदि आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर पाए गए थे तो अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? इन सवालों पर विभागीय जवाब का इंतजार है।
खागा में एंटी करप्शन की कार्रवाई से बढ़ी चर्चा
फतेहपुर जिले के खागा उपनिबंधक कार्यालय में हाल में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई में एक कनिष्ठ सहायक के रिश्वत लेते पकड़े जाने की घटना के बाद जिले के अन्य उपनिबंधन कार्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
इसी क्रम में अब सवाल उठ रहा है कि क्या फतेहपुर सदर उपनिबंधन कार्यालय में भी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही तैनाती और पटल व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी?
17 साल की तैनाती पर विभाग से जवाब की मांग
सरकारी कार्यालयों में पटल परिवर्तन का उद्देश्य किसी एक कर्मचारी के हाथ में लंबे समय तक किसी महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी केंद्रित होने से बचाना भी माना जाता है। ऐसे में करीब 17 वर्षों से एक ही सीट पर तैनाती की चर्चा कई सवाल खड़े करती है।
लोग जानना चाहते हैं कि—
- इतने लंबे समय तक एक ही सीट पर तैनाती कैसे बनी रही?
- क्या बीच में पटल परिवर्तन किया गया?
- संबंधित कर्मचारी के कार्यकाल की कभी विभागीय समीक्षा हुई?
- कार्यालय में आने वाली शिकायतों का निस्तारण किस स्तर पर हुआ?
- क्या पुराने रिकॉर्ड और वित्तीय प्रक्रियाओं का समय-समय पर ऑडिट या निरीक्षण हुआ?
इन सवालों का सही जवाब विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच से ही सामने आ सकता है।
पुराने रिकॉर्ड की जांच की उठ रही मांग
उपनिबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री, दस्तावेज और शुल्क से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। ऐसे में पारदर्शिता और रिकॉर्ड की शुचिता बेहद महत्वपूर्ण है।
यदि विभाग जांच कराता है तो कर्मचारियों की तैनाती, पटल परिवर्तन, शिकायतों, संबंधित रिकॉर्ड और वायरल वीडियो से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जा सकती है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कार्यालय की कार्यप्रणाली नियमों के अनुरूप चल रही है या नहीं।
‘बाबू पकड़ा गया, अब फतेहपुर में जांच कब?’
खागा कार्यालय में एंटी करप्शन की कार्रवाई के बाद अब फतेहपुर सदर उपनिबंधन कार्यालय को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सवाल यह है कि क्या विभाग किसी शिकायत या बड़ी कार्रवाई का इंतजार करेगा या स्वयं संज्ञान लेकर व्यवस्था की समीक्षा करेगा?
खास तौर पर करीब 17 वर्षों से एक ही सीट पर तैनाती की चर्चा और पूर्व में वायरल हुए वीडियो की सत्यता को लेकर जांच की मांग उठ रही है।
जांच से ही सामने आएगा सच
फिलहाल यह पूरा मामला आरोपों और चर्चाओं के स्तर पर है। किसान मेल इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता है। किसी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार या अनियमितता को तथ्य के रूप में तभी माना जा सकता है, जब सक्षम जांच एजेंसी या विभागीय जांच में इसकी पुष्टि हो।
अब निगाहें उपनिबंधन विभाग के उच्च अधिकारियों पर हैं। यदि विभाग निष्पक्ष जांच कराता है तो 17 वर्षों की तैनाती, पटल व्यवस्था, रिकॉर्ड और वायरल वीडियो से जुड़े कई सवालों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
इस मामले में संबंधित कर्मचारी अथवा विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।



