थानाध्यक्ष की आत्महत्या मामले में हनीट्रैप और एक करोड़ की ब्लैकमेलिंग का खुलासा, तीन गिरफ्तार

बस्ती। वाल्टरगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, मामला अवसाद से जुड़ा नहीं था, बल्कि कथित हनीट्रैप और एक करोड़ रुपये की ब्लैकमेलिंग से जुड़ा था। मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी महिला प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और कथित वसूली में शामिल अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव को गिरफ्तार किया है।
आपत्तिजनक वीडियो-ऑडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग का आरोप
डीआईजी संजीव त्यागी के मुताबिक, वाल्टरगंज क्षेत्र में तैनाती के दौरान सूर्य प्रकाश सिंह की पहचान प्रियंका चौधरी से हुई थी। पुलिस का दावा है कि नजदीकियां बढ़ने के बाद आरोपी महिला ने कथित तौर पर थानाध्यक्ष के आपत्तिजनक वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड कर लिए। इसके बाद व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए उन्हें ब्लैकमेल करने और एक करोड़ रुपये की मांग करने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, रकम न देने पर महिला कथित तौर पर वीडियो कॉल पर हाथ की नस काटने का नाटक करती थी और झूठे मुकदमे में फंसाने के साथ आत्महत्या करने की धमकी देती थी।
पिता और अधिवक्ता पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप
जांच में पुलिस ने प्रियंका के पिता रामनयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव को भी कथित सिंडिकेट का हिस्सा बताया है। पुलिस के मुताबिक, अधिवक्ता सौदेबाजी और रकम की वसूली में भूमिका निभाता था।
पुलिस का दावा है कि इस गिरोह ने इससे पहले एक डॉक्टर समेत तीन अन्य लोगों से करीब 24 लाख रुपये की कथित अवैध वसूली की थी। जांच एजेंसियां अब इन मामलों की भी पड़ताल कर रही हैं।
आखिरी कॉल के बाद बढ़ा दबाव
पुलिस के अनुसार, सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि 29 अगस्त को दोपहर 1:41 बजे अधिवक्ता विजय प्रकाश ने सूर्य प्रकाश सिंह को फोन किया था। आरोप है कि इस दौरान एक करोड़ रुपये देने के लिए उन पर दबाव बनाया गया।
पुलिस का दावा है कि इतनी बड़ी रकम का इंतजाम न कर पाने और सामाजिक बदनामी के भय से परेशान होकर सूर्य प्रकाश सिंह ने अपने सरकारी आवास में आत्महत्या कर ली।
मोबाइल फोन और बोलेरो बरामद
पुलिस ने तीनों आरोपियों को सदर अस्पताल के सामने से गिरफ्तार करने का दावा किया है। उनके कब्जे से एक बोलेरो और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, मोबाइल फोन में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
विधिक कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले में सामने आए डिजिटल साक्ष्यों और पूर्व की कथित वसूली की घटनाओं की भी जांच कर रही है।
नोट: हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग और वसूली से जुड़े आरोप पुलिस के दावों पर आधारित हैं; इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



