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गंगा का जलस्तर फिर बढ़ा, निचले इलाकों में आफत बरकरार; नाव से पहुंच रहा जरूरी सामान

ब्यूरो ऋषभ तिवारी

उन्नाव में गंगा के उतार-चढ़ाव ने बढ़ाई चिंता, कई मोहल्लों में अब भी भरा बाढ़ का पानी; घरों तक पहुंचना मुश्किल

उन्नाव। गंगा के जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच गंगा किनारे बसे निचले इलाकों के लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले दिनों जलस्तर में गिरावट से लोगों ने राहत की उम्मीद जताई थी, लेकिन मंगलवार शाम एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज होने के बाद चिंता बढ़ गई। बुधवार सुबह मामूली गिरावट के बाद गंगा का जलस्तर 112.400 मीटर दर्ज किया गया।

शाम को बढ़ा जलस्तर, सुबह मामूली गिरावट

केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 112.350 मीटर था। मंगलवार दोपहर तक जलस्तर में खास बदलाव नहीं हुआ, लेकिन शाम छह बजे यह बढ़कर 112.410 मीटर पहुंच गया। बुधवार सुबह इसमें एक सेंटीमीटर की मामूली गिरावट दर्ज की गई और जलस्तर 112.400 मीटर रहा।

इस तरह सोमवार शाम की तुलना में बुधवार सुबह तक जलस्तर में कुल पांच सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फिलहाल जलस्तर में कोई बड़ी वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उतार-चढ़ाव के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बनी हुई है।

कई मोहल्लों में अब भी भरा है बाढ़ का पानी

गंगाघाट क्षेत्र के निचले इलाकों में पहले से जमा बाढ़ का पानी अब भी पूरी तरह नहीं निकल सका है। गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, मोहम्मद नगर, रविदास नगर और मनोहर नगर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

गलियों और संपर्क मार्गों पर पानी जमा होने से लोगों का आवागमन प्रभावित है। कई स्थानों पर घरों के आसपास भी पानी भरा हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।

नाव बनी सहारा, इसी से पहुंच रहा जरूरी सामान

जलभराव के कारण कई परिवारों को आने-जाने और जरूरी सामान लाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। गोताखोर क्षेत्र में लोग नाव से खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सामान घरों तक पहुंचाते दिखाई दे रहे हैं।

बाढ़ के पानी के बीच सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को हो रही है। लोगों को डर है कि यदि जलस्तर में फिर बढ़ोतरी हुई तो पहले से जलमग्न इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

जलस्तर पर नजर, राहत की उम्मीद

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर घटने के बाद जल्द राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन दोबारा हुई बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल प्रशासन और बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

ग्रामीणों और मोहल्लेवासियों की मांग है कि प्रशासन निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए राहत व्यवस्था बनाए रखे और जरूरत पड़ने पर नाव तथा आवश्यक सामान की उपलब्धता सुनिश्चित करे।

फिलहाल गंगा का जलस्तर भले ही स्थिर नजर आ रहा हो, लेकिन निचले इलाकों में बाढ़ का पानी अब भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।

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