नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी नजर आ रहे हैं।

वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि जब कार्यक्रम में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण बजाया गया तो सोनिया गांधी ने इशारे के जरिए इसे रोकने के लिए कहा। वीडियो में उनके हाथ के इशारे को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं है कि उनका इशारा गीत रोकने के लिए ही था।

कांग्रेस ने दी अलग सफाई
वायरल वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस की ओर से सफाई दी गई। पार्टी के अनुसार सोनिया गांधी का इशारा मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को लेकर था, न कि वंदे मातरम् को रोकने के लिए। उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम् प्रस्तुत किया गया।
इस बीच सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बीजेपी नेताओं और समर्थकों की ओर से कांग्रेस पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस इसे गलत तरीके से पेश किए गए वीडियो का मामला बता रही है।
‘वंदे मातरम्’ को लेकर पहले से चल रहा राजनीतिक विवाद
दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से इस वर्ष आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के छह पदों के पूर्ण प्रस्तुतीकरण को लेकर नया प्रोटोकॉल सामने आया है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पूर्ण प्रस्तुति को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयों की बात कही थी।
इसी बीच स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की प्रस्तुति भी हुई। इसके बाद राष्ट्रगान बजाया गया।
वीडियो ने बढ़ाई सियासी गर्मी
कांग्रेस मुख्यालय के इस वीडियो ने एक बार फिर राष्ट्रगीत, राष्ट्रवाद और राजनीतिक दलों के रुख को लेकर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लोग वीडियो को अपने-अपने दावों के साथ साझा कर रहे हैं।
हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् रोकने का ही इशारा किया था, फिलहाल पुष्ट तथ्य नहीं है। कांग्रेस की सफाई इसके विपरीत है। ऐसे में वीडियो के साथ दोनों पक्षों के दावों को सामने रखना जरूरी है।



