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यूपी में 1 करोड़ महिलाओं को मिल सकता है 1-1 लाख रुपये का ब्याजमुक्त ऋण, दिसंबर से पहली किस्त की चर्चा

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, आधिकारिक मंजूरी के बाद साफ होगी तस्वीर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बड़ी पहल की तैयारी की चर्चा है। प्रस्तावित योजना के तहत प्रदेश की करीब 1 करोड़ महिलाओं को एक-एक लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की योजना बताई जा रही है। हालांकि, योजना के अंतिम स्वरूप, पात्रता और लागू होने की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

बताया जा रहा है कि यह पहल उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। प्रस्ताव के मुताबिक महिलाओं को कारोबार शुरू करने या पहले से चल रहे छोटे व्यवसाय को बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जा सकती है।

क्रेडिट कार्ड के जरिए मदद की तैयारी

प्रस्तावित व्यवस्था में पात्र महिलाओं को विशेष क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने की बात सामने आ रही है। इसके माध्यम से उन्हें कारोबार के लिए जरूरी पूंजी तक आसान पहुंच देने का उद्देश्य बताया जा रहा है। योजना लागू होने पर इसका लाभ बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों तक पहुंचने की उम्मीद है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की भी तैयारी

महिला स्वयं सहायता समूहों को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित रखने के बजाय उन्हें डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बिक्री और मार्केटिंग से जोड़ने की दिशा में भी काम किए जाने की चर्चा है। इसके लिए महिला समूहों को डिजिटल पहचान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।

इसके अलावा स्वरोजगार शुरू करने वाली महिलाओं के लिए ई-रिक्शा खरीद पर 2 लाख रुपये तक की सहायता देने और प्रदेश में 100 नए महिला शक्ति केंद्र स्थापित करने की योजना पर भी चर्चा है।

दिसंबर में पहली किस्त की बात, लेकिन आधिकारिक पुष्टि जरूरी

प्रस्तावित योजना को लेकर दिसंबर में पहली किस्त जारी किए जाने की चर्चा है। हालांकि, कितनी राशि किस महिला को मिलेगी, पात्रता क्या होगी, आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी और पहली किस्त की निश्चित तारीख क्या होगी, इन सभी बिंदुओं पर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

सरकार की ओर से कैबिनेट मंजूरी और औपचारिक आदेश जारी होने के बाद ही योजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित योजना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

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