4200 करोड़ के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर फिर सवाल, 24 घंटे में चार स्थानों पर धंसाव

ब्यूरो ऋषभ तिवारी
बारिश के बीच नए एक्सप्रेसवे की सड़क उखड़ने और धंसने से निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल, NHAI की निगरानी पर भी चर्चा
उन्नाव/लखनऊ। करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर लगातार सामने आ रही खामियों ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 63 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे पर कम समय के भीतर कई स्थानों पर सड़क के क्षतिग्रस्त होने और धंसने की घटनाएं सामने आई हैं।
ताजा स्थिति में महज 24 घंटे के भीतर एक्सप्रेसवे के चार अलग-अलग स्थानों पर सड़क के धंसने की जानकारी सामने आई है। मानसून की बारिश के बीच नई बनी सड़क की हालत बिगड़ने से वाहन चालकों और स्थानीय लोगों में भी चिंता बढ़ी है।

बारिश ने खोल दी निर्माण की परत?
एक्सप्रेसवे को लखनऊ और कानपुर के बीच तेज और सुगम आवागमन के लिए तैयार किया गया था। परियोजना का उद्देश्य पुराने मार्ग पर लगने वाले जाम से राहत दिलाना और दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय कम करना था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क के अलग-अलग हिस्सों में आई खराबी ने परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।
रिपोर्टों के मुताबिक बारिश के बाद कई हिस्सों में सड़क की सतह और निर्माण से जुड़े हिस्सों में समस्या सामने आई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सड़क निर्माण के दौरान मिट्टी की मजबूती, जल निकासी और अन्य तकनीकी मानकों की पर्याप्त निगरानी की गई थी।
करोड़ों की परियोजना, फिर मरम्मत का दौर
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस एक्सप्रेसवे पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए, वहां यातायात शुरू होने के कुछ ही समय बाद मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ रही है। इससे सरकारी धन के इस्तेमाल और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि सड़क में आई खराबी के वास्तविक कारणों का निर्धारण तकनीकी जांच के बाद ही किया जा सकेगा। केवल बारिश को जिम्मेदार मानना या निर्माण में कमी का निष्कर्ष निकालना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
NHAI की निगरानी पर भी उठे सवाल
एक्सप्रेसवे का निर्माण NHAI परियोजना के तहत हुआ है। ऐसे में सड़क की गुणवत्ता की निगरानी और निर्माण के दौरान तय तकनीकी मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
हाल की रिपोर्टों के अनुसार सड़क की खराबी के मामले में NHAI ने कार्रवाई करते हुए तीन इंजीनियरों के खिलाफ कदम उठाया है और विस्तृत जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्वतंत्र तकनीकी जांच से सामने आएगी असली वजह
मामले में तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होगी। सड़क धंसने के पीछे जलभराव, मिट्टी की स्थिति, बेस लेयर, निर्माण सामग्री या अन्य तकनीकी कारणों में से कौन जिम्मेदार है, यह विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल नई सड़क पर बार-बार सामने आ रही खराबी ने यात्रियों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी यह सवाल खड़ा कर दिया है कि 4200 करोड़ रुपये की इस बड़ी परियोजना की गुणवत्ता की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और जवाबदेही कब तय होगी?
किसान मेल न्यूज़ | उन्नाव



