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फतेहपुर: निजी नलकूप के कनेक्शन पर सीमेंट ईंट कारखाना चलाने का आरोप, बिजली विभाग की जांच पर उठे सवाल

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News

फतेहपुर। गाजीपुर क्षेत्र में बिजली कनेक्शन की श्रेणी और विभागीय जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चूरियानी पावर हाउस के पास चक इटौली मोड़ स्थित इंटरलॉकिंग सीमेंट ईंट कारखाने में कथित तौर पर निजी नलकूप के कनेक्शन पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वर्ष 2015 में निजी नलकूप के नाम पर तैयार दस्तावेजों के आधार पर कारखाना करीब दस वर्षों तक चलता रहा।

शिकायत मिलने के बाद मौके पर जांच करने पहुंचे अवर अभियंता (जेई) और उपखंड अधिकारी (एसडीओ) ने बिजली आपूर्ति काट दी। हालांकि, इसके बाद मामले में क्या विभागीय कार्रवाई हुई और कनेक्शन से जुड़े अभिलेखों की क्या स्थिति है, इसे लेकर शिकायतकर्ता सवाल उठा रहे हैं।

जेई और एसडीओ के बयानों में स्पष्टता पर सवाल

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, जेई ने जांच के दौरान समय पर कागजात उपलब्ध नहीं होने की बात कही, जबकि एसडीओ ने कनेक्शन होने और दस्तावेज दिखाए जाने का दावा किया। इसके बावजूद डिवीजन कार्यालय में संबंधित अभिलेख उपलब्ध होने की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि कनेक्शन निजी नलकूप के लिए स्वीकृत था, तो उसके तहत व्यावसायिक कारखाना संचालित किए जाने की शिकायत की जांच किस आधार पर की गई? कनेक्शन की स्वीकृत श्रेणी, लोड, बिलिंग और पिछले वर्षों की बिजली खपत के रिकॉर्ड की जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप का भी आरोप

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मामले में एक जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद जांच रिपोर्ट में नरमी बरती गई। हालांकि, इस कथित हस्तक्षेप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित जनप्रतिनिधि का पक्ष भी सामने आना बाकी है।

निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर मांग उठ रही है कि बिजली विभाग के उच्चाधिकारी कनेक्शन से संबंधित मूल अभिलेखों, स्वीकृत लोड, कनेक्शन की श्रेणी, बिलिंग और बिजली खपत के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराएं। साथ ही, जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों की भूमिका और कथित हस्तक्षेप के आरोपों की भी पड़ताल की जाए।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर कनेक्शन में अनियमितता या किसी अधिकारी की मिलीभगत को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता। विभागीय जांच और अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। अब देखना होगा कि बिजली विभाग इस प्रकरण में विस्तृत जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करता है या नहीं।

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