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करोड़ों की सड़क, बारिश में फिर बेनकाब हुई गुणवत्ता!,कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह धंसी मिट्टी और टूटी नालियां, निर्माण के बाद से शिकायतों का सिलसिला जारी

ब्यूरो ऋषभ तिवारी

उन्नाव। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बारिश शुरू होते ही एक्सप्रेसवे के किनारे मिट्टी धंसने और जलनिकासी के लिए बनाई गईं कंक्रीट की नालियां टूटने की तस्वीर सामने आई है। सड़क बनने के बाद से ही इसकी गुणवत्ता और निर्माण कार्य को लेकर शिकायतें उठती रही हैं। अब बारिश के दौरान सामने आई नई खामियों ने जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बारिश ने खोल दी सड़क किनारे निर्माण की पोल

कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन में कई स्थानों पर सड़क के किनारे की मिट्टी धंस गई। बेगमखेड़ा, काशीपुर, बछौरा और मेदपुर के आसपास जलनिकासी नालियों और साइड पटरी में नुकसान सामने आया है। बारिश का पानी सड़क किनारे की मिट्टी को बहा रहा है, जिससे आने वाले समय में नुकसान और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

सड़क बनने के बाद से क्यों उठते रहे सवाल?

एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद से ही अलग-अलग स्थानों पर सड़क की गुणवत्ता, किनारों की मजबूती और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में निर्माण के कुछ समय बाद ही बारिश में सड़क किनारे मिट्टी धंसने और नालियों के टूटने की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर निर्माण के दौरान मानकों का कितना पालन किया गया?

हर बार मरम्मत, फिर वही समस्या

नुकसान सामने आने के बाद निर्माण एजेंसी की ओर से मरम्मत का काम शुरू करा दिया गया है। क्षतिग्रस्त स्थानों पर स्टोन डस्ट और अन्य सामग्री डालकर सड़क किनारे के हिस्से को मजबूत किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि यदि बारिश के बाद बार-बार इसी तरह की समस्या सामने आती है तो केवल मरम्मत से कब तक काम चलेगा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की ऊपरी मरम्मत के बजाय इसकी गुणवत्ता, मिट्टी की मजबूती और जलनिकासी व्यवस्था की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि समस्या की असली वजह सामने आ सके।

जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी या मामला फिर दब जाएगा?

एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर सड़क किनारे मिट्टी का धंसना और जलनिकासी व्यवस्था का क्षतिग्रस्त होना सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग और तकनीकी विशेषज्ञ पूरे मामले की जांच करें और यह पता लगाएं कि नुकसान की वजह प्राकृतिक परिस्थितियां हैं या निर्माण से जुड़ी कोई कमी।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार विभाग केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत तक सीमित रहता है या सड़क की गुणवत्ता और निर्माण मानकों की भी गंभीरता से जांच कराई जाती है।

किसान मेल |

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