झोलाछाप के इलाज से मौतों के मामलों पर डीएम सख्त, विजयीपुर में जांच के आदेश

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News
फतेहपुर। विजयीपुर क्षेत्र में कथित झोलाछाप के इलाज से मौत के सामने आ रहे मामलों को जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने गंभीरता से लिया है। डीएम ने बुधवार को विजयीपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में पिछले तीन वर्षों के दौरान इलाज के दौरान हुई मौतों और संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई की जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी डॉ. पीके सिंह को सौंपी गई है।
जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि अब तक कितने अस्पतालों और क्लीनिकों को सील किया गया, उन्हें दोबारा खोलने के आदेश किसने दिए, कितने अस्पतालों एवं पैथोलॉजी केंद्रों को नोटिस जारी किए गए और नोटिस के बाद क्या कार्रवाई हुई। इस जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग की पूर्व कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था भी जांच के दायरे में रहेगी।
कई क्लीनिकों को 24 घंटे में दस्तावेज देने का नोटिस
बुधवार को जांच टीम ने विजयीपुर क्षेत्र में संचालित क्लीनिकों का निरीक्षण किया। इस दौरान मानकों और आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित कमियां पाए जाने पर संचालकों को नोटिस जारी किए गए। उन्हें 24 घंटे के भीतर संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
नोटिस पाने वाले प्रतिष्ठानों में रक्षपालपुर का प्रमिल मेडिकल स्टोर, कनपुरवा का नारायण पॉलीक्लिनिक, धाता रोड गौरवा मोड़ स्थित कामधेनु पॉलीक्लिनिक और विजयीपुर-धाता रोड स्थित सरस्वती पॉलीक्लिनिक शामिल हैं। इसके अलावा बरैची और थुरियानी में बिना स्पष्ट नाम के संचालित बताए जा रहे क्लीनिकों के संचालकों को भी नोटिस दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने या मानकों का पालन नहीं पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई सामने आई है।
जांच अभियान जारी रखने के निर्देश
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. बृजेश पांडेय ने बताया कि जांच अभियान लगातार जारी रहेगा और कमियां मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच टीम में डॉ. नवीन, डॉ. भरत और डॉ. अशोक भी शामिल रहे।
सद्गुरु क्लीनिक और छात्र शशांक की मौत का मामला भी चर्चा में
रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 में सोनमऊ निवासी एक भट्ठा मजदूर की मौत के बाद सील किए गए सद्गुरु क्लीनिक के दोबारा खुलने का मामला भी चर्चा में है। इसी क्लीनिक में कथित गलत इंजेक्शन से एक बच्ची की मौत के मामले को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसके अलावा पीएचसी की बाउंड्री से सटे डॉक्टर मनोज के क्लीनिक में छात्र शशांक की मौत का मामला भी चर्चा में रहा है।
रिपोर्ट में कुछ कथित झोलाछापों की ओर से नाम न छापने की शर्त पर कार्रवाई के नाम पर वसूली के आरोप लगाए जाने का भी उल्लेख है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
सीएमओ डॉ. यूबी सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच में किन क्लीनिकों के दस्तावेज और संचालन संबंधी व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप पाई जाती हैं और किनके खिलाफ कार्रवाई होती है, यह रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा।



