बैटरी फैक्ट्री में जीएसटी की दस्तक, घंटों चली पड़ताल; नकदी की चर्चाओं से गरमाया मामला

ब्यूरो ऋषभ तिवारी
दयालखेड़ा में अचानक पहुंची टीम ने खंगाले कारोबारी कागजात, बाद में आयकर विभाग ने भी संभाली जांच की कमान
उन्नाव। मगरवारा चौकी क्षेत्र के दयालखेड़ा गांव में बुधवार शाम एक बैटरी फैक्ट्री में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब राज्य जीएसटी विभाग की टीम अचानक जांच के लिए पहुंच गई। अधिकारियों के पहुंचते ही फैक्ट्री के कामकाज से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी गई।
टीम ने फैक्ट्री के कार्यालयों में रखे खरीद-बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड, बिल-बाउचर, लेनदेन से जुड़े कागजात और वित्तीय विवरणों को बारीकी से देखा। अधिकारियों ने कारोबार में दर्ज आंकड़ों और उपलब्ध दस्तावेजों के बीच स्थिति का मिलान भी किया।
नकदी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं
जांच के बीच फैक्ट्री में बड़ी रकम मिलने की खबर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। कुछ लोगों की ओर से करोड़ों रुपये की नकदी मिलने की बातें कही जाती रहीं। हालांकि, देर रात तक विभाग की ओर से न तो नकदी की कोई अधिकृत रकम बताई गई और न ही इसकी बरामदगी की पुष्टि की गई।
नकदी वास्तव में मिली या नहीं, मिली तो कितनी और उसका कारोबारी रिकॉर्ड से क्या संबंध है—इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।
रिकॉर्ड की गहराई से जांच
जीएसटी अधिकारियों ने फैक्ट्री में उपलब्ध कारोबारी कागजात की जांच के दौरान लेनदेन, आय-व्यय और खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड पर विशेष ध्यान दिया। संबंधित कर्मचारियों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी आवश्यक जानकारी लिए जाने की बात सामने आई है।
जांच का उद्देश्य रिकॉर्ड में दर्ज कारोबार और वास्तविक गतिविधियों के बीच किसी संभावित अंतर को समझना भी माना जा रहा है।
आयकर विभाग की टीम भी पहुंची
जीएसटी विभाग की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग को भी सूचना दी गई। इसके बाद आयकर अधिकारियों की टीम फैक्ट्री पहुंची और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की अलग से पड़ताल शुरू कर दी।
देर रात तक दोनों विभागों के अधिकारी फैक्ट्री परिसर में मौजूद रहे। आय-व्यय, कारोबारी लेनदेन और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच जारी रही।
कानपुर तक पहुंची जांच की आंच
मामले की जांच उन्नाव स्थित फैक्ट्री तक सीमित नहीं रही। फैक्ट्री से जुड़े कानपुर स्थित एक प्रतिष्ठान पर भी आयकर विभाग की टीम के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। वहां भी कारोबारी दस्तावेजों और वित्तीय गतिविधियों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की गई।
विभागीय बयान के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल कार्रवाई को लेकर विभागों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। न ही नकदी मिलने, कर चोरी या किसी अन्य वित्तीय अनियमितता की पुष्टि की गई है।
ऐसे में करोड़ों रुपये की नकदी मिलने जैसी चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि होने तक इन्हें केवल चर्चाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। जांच पूरी होने के बाद विभागीय रिपोर्ट से ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
किसान मेल न्यूज़ | उन्नाव



