40 दिन बाद भी कोरारी कलां गौशाला की जांच अधूरी, सचिव निलंबित फिर भी रिपोर्ट का इंतजार

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News
उन्नाव। बिछिया ब्लॉक क्षेत्र के कोरारी कलां गांव की गौशाला में गोवंश के शव मिलने के मामले में कार्रवाई तो तत्काल हुई, लेकिन जांच की रफ्तार अब सवालों के घेरे में है। मामला सामने आने के करीब 40 दिन बीत जाने के बाद भी गठित जांच टीम अपनी रिपोर्ट पूरी नहीं कर सकी है। तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव संदीप मिश्रा को निलंबित किया जा चुका है, जांच टीम गठित हो चुकी है, लेकिन पूरे प्रकरण की अंतिम तस्वीर अब तक सामने नहीं आई है।
14 अगस्त को कोरारी कलां गांव के बाहर खेतों में कई मृत गोवंश मिलने का मामला सामने आया था। ग्रामीणों ने लगातार मृत गोवंश मिलने को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उस समय ग्रामीणों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि मृत पशुओं को रात में गौशाला से बाहर खेतों में फेंका जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद होनी थी। दूसरी ओर तत्कालीन सचिव संदीप मिश्रा ने आरोपों से इनकार करते हुए गौशाला में 105 गोवंश मौजूद होने की बात कही थी।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव संदीप मिश्रा को निलंबित कर दिया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सचिव पर मृत गोवंशों के समुचित निस्तारण और पदेन दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही का आरोप लगाया गया था। प्रकरण की जांच के लिए अपर जिला पंचायतराज अधिकारी को नामित किया गया था।
कार्रवाई हुई, लेकिन जांच का निष्कर्ष अब भी नहीं
सचिव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के बाद उम्मीद थी कि जांच तेजी से पूरी होगी और गौशाला में मृत मिले गोवंशों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। लेकिन करीब 40 दिन गुजरने के बाद भी जांच रिपोर्ट पूरी नहीं हो सकी है।
जिला पंचायतराज अधिकारी श्रीकांत यादव के अनुसार, जांच टीम में शामिल एक सदस्य की तबीयत खराब होने के कारण जांच प्रभावित हुई है। इसके चलते रिपोर्ट तैयार करने में देरी हुई।
अब जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने मामले की जांच को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने जांच टीम को 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
आखिर 40 दिन में क्यों पूरी नहीं हुई जांच?
इस पूरे प्रकरण में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मामला गंभीर था, तत्काल कार्रवाई हुई और जांच टीम भी गठित कर दी गई थी, तो करीब 40 दिन बाद भी जांच पूरी क्यों नहीं हो सकी?
जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि खेतों में मिले मृत गोवंश गौशाला से संबंधित थे या नहीं, गौशाला में दर्ज गोवंशों की वास्तविक संख्या कितनी थी, उनकी देखरेख किस स्थिति में थी और मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था किस तरह की जा रही थी।
ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों और पंचायत स्तर से सामने आए दावों के बीच वास्तविक स्थिति भी जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब 15 दिन की नई समयसीमा
प्रकरण में पहले सचिव के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। अब प्रशासन के सामने जांच पूरी कर वास्तविक जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है। डीएम के निर्देश के बाद जांच टीम को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी।
करीब 40 दिन से लंबित जांच के बाद अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि नई समयसीमा में रिपोर्ट आती है या मामला एक बार फिर फाइलों में उलझकर रह जाता है।
फिलहाल सवाल यही है—कार्रवाई के 40 दिन बाद भी जब जांच पूरी नहीं हुई, तो अब डीएम की 15 दिन की समयसीमा में क्या सच सामने आएगा?



