अधिवक्ताओं की 15 सूत्रीय मांगों को लेकर 30 सितंबर को कानपुर में बड़ा प्रदर्शन, सामूहिक अवकाश पर रहेंगे वकील

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News
कानपुर। अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और पेशागत अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर कानपुर में आंदोलन तेज होता जा रहा है। कानपुर बार एसोसिएशन और दि लॉयर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 10 और 11 सितंबर को आयोजित प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन में लिए गए निर्णयों के क्रम में अब 30 सितंबर 2026 को कानपुर के अधिवक्ता सामूहिक अवकाश पर रहकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे।
इस दौरान कानपुर जनपद न्यायालय परिसर को मानव श्रृंखला के रूप में जोड़कर भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और न्यायपालिका का ध्यान अधिवक्ताओं की मांगों की ओर आकर्षित करने की योजना है।

प्रांतीय सम्मेलन में प्रदेशभर के अधिवक्ताओं से जुड़े सुरक्षा, स्वतंत्रता और कल्याण के मुद्दों पर चर्चा की गई थी। सम्मेलन में अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की गई थी। सम्मेलन के बाद कानपुर समेत कई जिलों में प्रत्येक बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का आह्वान किया गया।
15 सूत्रीय मांगों का मुख्यमंत्री को दिया जा चुका है ज्ञापन
23 सितंबर को कानपुर में अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से न्यायिक कार्य से विरत रहकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान बार और लॉयर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन एडीशनल कमिश्नर को सौंपा। एडीशनल कमिश्नर ने ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेजने का आश्वासन दिया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मांगों में अधिवक्ताओं के प्रति की जा रही टिप्पणियों, कॉलेजियम व्यवस्था, अधिवक्ता पेंशन और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट जैसे मुद्दे शामिल हैं।
प्रांतीय सम्मेलन में उठे ये प्रमुख मुद्दे
10-11 सितंबर के सम्मेलन से पहले कानपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र अवस्थी लल्लन, महामंत्री बिनय कुमार मिश्रा, दि लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र वर्मा और महामंत्री राजीव यादव ने बताया था कि सम्मेलन में अधिवक्ताओं के हित, सुरक्षा और कल्याण से जुड़े प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में—
- अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना।
- वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन की व्यवस्था।
- अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्य से विरत रहने के अधिकार से जुड़े प्रतिबंधों पर पुनर्विचार।
- बार काउंसिल द्वारा हड़ताल को लेकर अधिवक्ता संघों से अंडरटेकिंग लेने की व्यवस्था पर आपत्ति।
- एडवोकेट एक्ट, 1961 में प्रस्तावित संशोधनों पर पुनर्विचार।
- अधिवक्ताओं से संबंधित मुकदमों को दूसरे जिलों में स्थानांतरित करने संबंधी व्यवस्था पर पुनर्विचार।
- अधिवक्ताओं की सुरक्षा और पेशागत स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग।
- अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग।
जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए हैं।
प्रदेशभर में दिखा सम्मेलन के फैसले का असर
कानपुर में हुए सम्मेलन के निर्णय के बाद प्रदेश के दूसरे जिलों की बार एसोसिएशनों ने भी समर्थन जताया है। बुलंदशहर, फतेहपुर, मुरादाबाद समेत कई स्थानों से अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने की खबरें सामने आई हैं। फतेहपुर में भी 10-11 सितंबर के सम्मेलन के बाद प्रत्येक बुधवार न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय बताया गया था।
मुरादाबाद बार एसोसिएशन की बैठक में भी कानपुर सम्मेलन में उठाए गए मुद्दों का समर्थन किया गया। वहां अधिवक्ता सुरक्षा कानून, अधिवक्ताओं से अंडरटेकिंग लिए जाने, एडवोकेट एक्ट में प्रस्तावित बदलाव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
30 सितंबर को मानव श्रृंखला बनाने की तैयारी
अब 30 सितंबर को कानपुर के अधिवक्ताओं द्वारा सामूहिक अवकाश लेकर जनपद न्यायालय परिसर को मानव श्रृंखला के माध्यम से जोड़ने की तैयारी है। पोस्टर में कहा गया है कि इसके जरिए भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और न्यायपालिका का ध्यान अधिवक्ताओं की 15 सूत्रीय मांगों की ओर आकर्षित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम की अगुवाई कानपुर बार एसोसिएशन के महामंत्री बिनय कुमार मिश्रा के नाम से जारी पोस्टर में की गई है। पोस्टर में उन्हें कानपुर बार एसोसिएशन का महामंत्री बताया गया है।
इससे पहले 23 सितंबर को अधिवक्ताओं के सामूहिक अवकाश के दौरान रजिस्ट्री कार्यालय में भी काम प्रभावित हुआ था। बार एसोसिएशन और लॉयर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही थी।



