फतेहपुर में ओवरलोड मोरम लदे डंपरों के संचालन पर उठे सवाल, कार्रवाई और निगरानी पर मांगा जा रहा जवाब
ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News
फतेहपुर। जनपद में ओवरलोड मोरम लदे डंपरों के कथित संचालन को लेकर खनन विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जिलाधिकारी के निर्देश पर ओवरलोडिंग रोकने के लिए जांच और कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर आरोप हैं कि जिले के विभिन्न मार्गों से ओवरलोड वाहन लगातार गुजर रहे हैं। ऐसे में ओवरलोडिंग पर प्रभावी अंकुश लगाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुबह के समय ओवरलोड वाहनों के निकलने का आरोप
स्थानीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि सुबह पांच बजे से आठ बजे के बीच ओवरलोड मोरम लदे वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। आरोप है कि इस दौरान बड़ी संख्या में वाहन जनपद से बाहर निकल जाते हैं। आरटीओ कार्यालय के सामने से लखनऊ बाईपास की ओर जाने वाले मार्ग पर भी ऐसे वाहनों के गुजरने की बात कही जा रही है।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह जांच का विषय होगा कि संबंधित मार्गों पर नियमित निगरानी की क्या व्यवस्था है और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कितनी कार्रवाई की जा रही है।
खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ओवरलोडिंग की शिकायतों के बीच खनन विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह जानने की मांग की जा रही है कि निर्धारित क्षमता से अधिक खनिज लादकर चलने वाले वाहनों की जांच किस प्रकार की जा रही है और दोषी वाहन संचालकों पर क्या कार्रवाई हुई है।
हालांकि, अधिकारियों की मिलीभगत या जानबूझकर कार्रवाई नहीं करने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
जिलाधिकारी के निर्देशों के बावजूद निगरानी पर सवाल
जनपद में ओवरलोडिंग रोकने के लिए जांच अभियान चलाए जाने के दावों के बीच वाहनों की आवाजाही को लेकर सामने आ रही शिकायतें निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं। यदि निर्धारित मार्गों पर ओवरलोड वाहन लगातार गुजर रहे हैं, तो जांच व्यवस्था की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।
ओवरलोडिंग पर प्रभावी कार्रवाई की मांग
ओवरलोड वाहनों के संचालन से सड़कों को नुकसान पहुंचने और सड़क सुरक्षा प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में संबंधित विभागों से मांग की जा रही है कि संवेदनशील मार्गों पर नियमित जांच की जाए, नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई हो और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
फिलहाल ओवरलोडिंग से जुड़े आरोपों, सुबह के समय वाहनों की आवाजाही और खनन विभाग की भूमिका के संबंध में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।



