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दस साल पुराने पुजारी हत्याकांड में दो आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी, अदालत ने दिया संदेह का लाभ

ब्यूरो रिपोर्ट: ऋषभ तिवारी

उन्नाव। जिले के माखी थाना क्षेत्र में करीब दस साल पहले हुए पुजारी हत्याकांड में न्यायालय ने दो आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार सिंह ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप साबित नहीं कर पाने और साक्ष्यों में विरोधाभास पाए जाने पर दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ दिया।

मामला भदियार गांव निवासी पं. गंगासागर शुक्ला की हत्या से जुड़ा है। उनके बेटे लवकुश ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि 2 फरवरी 2016 की शाम करीब सात बजे उनके पिता सेहरा गांव में शादी कराने जा रहे थे। इसी दौरान जयसिंह के बाग के पास घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

पुलिस ने शुरुआत में कमल किशोर मिश्रा और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान भदियार गांव के विमल किशोर और विष्णुकांत के नाम भी सामने आए। पुलिस ने 19 सितंबर 2017 को दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले के मुख्य आरोपी कमल किशोर मिश्रा की मृत्यु हो चुकी है।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। घटना के चश्मदीद गवाह की भी न्यायालय में बयान देने से पहले मृत्यु हो गई थी। वहीं, एक अन्य गवाह ने घटना के समय दिल्ली में होने की बात कही। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड में भी आरोपियों की लोकेशन घटनास्थल पर नहीं मिली।

इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

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