अंतरिक्ष अब युद्ध का नया मोर्चा, भारत के युवाओं को इन्नोवेशन और आर एंड डी की शक्ति बनना होगा: डॉ. राजेश्वर सिंह।

लखनऊ,
26 सितंबर 2026
अगला विश्वयुद्ध धरती पर नहीं, अंतरिक्ष में! युवाओं को डॉ. राजेश्वर सिंह की बड़ी चेतावनी
तलवार का युग बीता—अब कोड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उपग्रह (सैटेलाइट्स) तय करेंगे युद्ध का परिणाम
अंतरिक्ष में तैनात हुए हथियार! डॉ. राजेश्वर सिंह बोले—भारत के लिए तैयारी का समय अभी
सीमा पर जवान और प्रयोगशाला में वैज्ञानिक—दोनों राष्ट्र के रक्षक: डॉ. राजेश्वर सिंह
सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अंतरिक्ष में बढ़ती सैन्य क्षमताओं को भविष्य की राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि आने वाले युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अंतरिक्ष और साइबर स्पेस भी प्रमुख मोर्चे होंगे।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के ‘स्पेस कंट्रोल वेपन्स’ (अंतरिक्ष नियंत्रण हथियार), चीन और रूस की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताएं तथा ‘गोल्डन डोम’ जैसे मिसाइल डिफेंस (मिसाइल रक्षा) प्रयास बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के संकेत हैं। उपग्रहों (सैटेलाइट्स) पर हमला संचार, नेविगेशन (दिशा-सूचन), बैंकिंग और सैन्य प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि ‘मिशन शक्ति 2019’ के माध्यम से भारत ने अपनी अंतरिक्ष रक्षा क्षमता प्रदर्शित की। लगभग ₹26,968 करोड़ के स्पेस-बेस्ड सर्विलांस (अंतरिक्ष-आधारित निगरानी) (SBS-3) प्रोग्राम के तहत 52 निगरानी उपग्रहों का निर्माण भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं को दर्शाता है।
उन्होंने अनुसंधान एवं विकास (R&D) में अधिक सार्वजनिक एवं निजी निवेश, अत्याधुनिक अनुसंधान तथा वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों (इनोवेटर्स) को बेहतर प्रोत्साहन देने पर जोर दिया।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “सीमा पर खड़ा जवान और लैबोरेटरी (प्रयोगशाला) में काम करता वैज्ञानिक, दोनों देश के रक्षक हैं। युद्ध के हथियार और तरीके बदल रहे हैं—कल तलवार थी, आज कोड, उपग्रह और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हैं।”
उन्होंने युवाओं से नवप्रचार (इनोवेशन), कौशल (स्किल्स) और अनुसंधान (रिसर्च) को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत की तकनीकी ताकत और राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारी का समय अभी है।
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