फतेहपुर: नाबालिग से जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, एसपी को सौंपा प्रार्थना पत्र

खागा कोतवाली क्षेत्र का मामला, धमकी देकर बयान प्रभावित करने का आरोप; शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष विवेचना और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की उठाई मांग
ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News
फतेहपुर। जनपद के खागा कोतवाली क्षेत्र में नाबालिग से जुड़े एक गंभीर आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष एवं गहन जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने मामले की विवेचना और अब तक हुई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की गंभीरता से समीक्षा करने तथा कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया है।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, नाबालिग के कथित अपहरण और यौन अपराध से जुड़े मामले में कुछ लोगों की भूमिका संदिग्ध होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के संबंध में पहले ही मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है, लेकिन विवेचना की प्रक्रिया और अब तक की कार्रवाई को लेकर उन्हें आपत्तियां हैं।
धमकी देकर बयान प्रभावित करने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नाबालिग पर दबाव बनाने और उसे धमकाने का प्रयास किया गया। प्रार्थना पत्र में कथित तौर पर आपत्तिजनक तस्वीरें इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने की धमकी दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि इस तरह के दबाव से पीड़िता की सुरक्षा और मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
विवेचना और पुलिस की भूमिका की समीक्षा की मांग
शिकायतकर्ता ने विवेचना के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और संबंधित पुलिस अधिकारी की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों, साक्ष्यों और परिस्थितियों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए, ताकि किसी भी पहलू की अनदेखी न हो।
पीड़िता की सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई पर जोर
पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पीड़िता की सुरक्षा एवं निजता का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही, जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही, अनुचित दबाव या कानूनी अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
नाबालिग से जुड़ा मामला होने के कारण इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना और उसकी गरिमा की रक्षा करना महत्वपूर्ण है। फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। अब प्रार्थना पत्र पर पुलिस प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।



