प्रभु श्रीराम ने चलाया बाण, धू-धू कर जला अहंकारी लंकापति रावण का पुतला, दशहरे मैदान में जय जय श्रीराम के गूंज उठे जयकारे

नरेन्द्र राय रायसेन
रायसेन के दशहरा मैदान पर हुआ रावण के 35 फिट ऊंचे रावण के पुतले का दहन, रामलीला के जीवंत मंचन ने बांधा समां; आसमान में सतरंगी आतिशबाजी की बिखेरी अनोखी छटा
रायसेन। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व रायसेन शहर में भारी उमंग,उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। स्थानीय दशहरा मैदान पर अधर्म पर धर्म और बुराइयों पर अच्छाई की विजय के प्रतीक दशहरे पर्व का मुख्य समारोह श्री हिंदू उत्सव समिति रायसेन के बैनर तले आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए। कार्यक्रम में विशेष अतिथि की हैसियत से सांची भाजपा विधायक डॉ प्रभुराम चौधरी, नपाध्यक्ष सविता जमना सेन, बीजेपी जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंत बबलू मीणा, श्री हिंदू उत्सव समिति रायसेन अध्यक्ष रवि खत्री,पूर्व हिंदू उत्सव समिति अध्यक्षों सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की हनुमानजी और लंकापति दशानन की सेनाओं के बीच महासंग्राम हुआ। प्रभु श्रीराम के अग्निबाण चलाते ही अहंकारी रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा। आसमान में उठती आग की लपटों और चित्ताकर्षक आतिशबाजी और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच दशहरे मैदान में लगभग 51 फिट ऊंचे दशानन के पुतले के जलते ही जय जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शकों ने बुराई के अंत और अच्छाई की जीत के प्रतीक इस दृश्य को देखा। इसके पूर्व जय रघुवीर जय महावीर समिति द्वारा सिद्ध बालाजी मंदिर बावड़ीपुरा से हनुमानजी के रौद्र रूपी मुखौटे की शोभायात्रा डीजे ढोल नगाड़ों से शुरू हुई। बड़े मंदिर से लंकापति रावण की सेना, श्रीराम चंद्र की सेना की भी शोभायात्रा निकली। जो शहर के मुख्य मुख्य मार्गों से होती हुई दशहरे ग्राउंड पहुंची। इसके बाद प्रभु श्रीराम लक्ष्मण सहित केसरी नंदन हनुमान की सेना और लंकापति दशानन की मायावी सेना के बीच महासंग्राम हुआ। अंत में श्रीराम के बाण ने रावण के नाभि में लगते ही धरती पर जा गिरा।दशहरा मैदान में शाम 7 बजे रामलीला का मंचन शुरू हुआ। इसमें कलाकारों ने रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत किया। सबसे पहले श्रीराम के हाथों कुंभकर्ण लक्ष्मण के हाथों मेघनाद सहित आसुरी शक्तियों का वध का मंचन हुआ। कुंभकर्ण का प्रभावशाली अभिनय दौलत लोधी ने किया, जबकि रावण की भूमिका दौलत ठाकुर ने निभाई। इसके बाद लक्ष्मण द्वारा मेघनाथ वध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने दर्शकों की सराहना बटोरी।
केसरी नंदन हनुमान के प्रहार से रावण का अंत, कलाकारों ने जीता दिल
रामलीला मंचन के दौरान रौद्र रूपी हनुमानजी की भूमिका में इस बार गोविंद यादव पिता प्रीतम यादव 21वर्ष ठाकुर मोहल्ला ने दमदार अभिनय किया। कलाकारों के संवाद, अभिनय और युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। वहीं अखाड़ों के पहलवानों द्वारा हैरतभरे कारनामे प्रस्तुत कर दर्शकों का मनमोह लिया।
रात में लंकापति रावण के पुतले का दहन किया गया। श्रीराम के बाण चलाते ही रावण का पुतला आग की लपटों में घिर गया। देखते ही देखते पुतला जल उठा और मैदान में मौजूद लोगों ने जय जय श्रीराम के जयकारों के साथ दशहरा उत्सव मनाया।
ढोल-नगाड़ों की थाप पर विदा हुईं मां दुर्गा , महाकाली की प्रतिमाएं, देर रात तक निकला प्रतिमा विसर्जन चल समारोह,विजयादशमी पर शहर में निकलीं आकर्षक देवी दुर्गा मां काली की झांकियां, जाखा बेतवा नदी माखनी तालाब घाट बना मुख्य विसर्जन स्थल; सुरक्षा के लिए जिला व पुलिस प्रशासन ने किए पुख्ता इंतजाम
विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को रायसेन में मां दुर्गा माता महाकाली की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला दोपहर बाद शुरू हो गया था। शारदीय नवरात्रि महोत्सव में नौ दिनों तक मां दुर्गा काली की पूजा-अर्चना, आरती और धार्मिक आयोजनों से गुलजार रहे झांकी पंडालों में विदाई की बेला में भक्तों द्वारा नम आंखों से दी विदाई।श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की थाप, डीजे पर बजते भक्ति गीतों और जयकारों के बीच मां दुर्गा काली जी को विदाई देते नजर आए। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती देवी दुर्गा झांकियों के कारण माहौल भक्तिमय बना । शाम से शुरू हुआ दुर्गा झांकी विसर्जन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
शारदीय नवरात्र के दौरान शहर और आसपास के क्षेत्रों में जगह-जगह मां दुर्गा माता महाकाली की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। नौ दिनों तक श्रद्धालुओं ने पंडालों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। विजयादशमी पर्व पर अब समितियां विधि-विधान से पूजा करने के बाद प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए निकलीं । चल समारोह के जुलूस में शामिल देवी दुर्गा काली की आकर्षक झांकियों में श्रद्धालु नाचते-गाते हुए मां जगदंबे को विदाई दी । कई स्थानों पर आकर्षक झांकियां भी लोगों का ध्यान खींच रही थी।
माखनी तालाब घाट में व्यवस्थित विसर्जन की गई व्यवस्था
दुर्गा काली की प्रतिमाओ के विसर्जन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन ने माखनी तालाब घाट को मुख्य विसर्जन स्थल बनाया है। गोताखोरों की टीम तैनात रहीं।यहां प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की गई ।ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो और मूर्ति विसर्जन का काम व्यवस्थित तरीके से पूरा हो सके। इसके अलावा कुछ दुर्गा उत्सव समितियों ने जाखा रीछन नदी पुल के पास भी प्रतिमाओं का विसर्जन किया।विजयादशमी पर रात में शहर का भव्य चल समारोह आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें विभिन्न दुर्गा मां काली उत्सव समितियों की झांकियां शामिल हुईं । चल समारोह शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। मां दुर्गा महाकाली की नयनाभिराम झाकियों का चल समारोह को देखने के लिए रायसेन शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। झांकियों और मां दुर्गा माता महाकाली की प्रतिमाओं की विदाई देखने के लिए प्रमुख मार्गों पर लोगों की भीड़ जुटी । धार्मिक उल्लास के बीच प्रशासन के सामने विसर्जन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की चुनौती भी रही।
शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक मां भवानी की आराधना करने वाले श्रद्धालु नम आंखों और जयकारों के साथ मां दुर्गा को विदाई दी।विजयादशमी के साथ ही शहर में नवरात्र उत्सव का समापन हुआ ।




