हेल्थ एंड टेक्नोलॉजी

दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की वैश्विक क्रांति में भारत बने नेतृत्वकर्ता: डॉ. राजेश्वर सिंह।

-AI, बायोटेक्नोलॉजी और हेल्थ का संगम बनेगा भविष्य की सबसे बड़ी इंडस्ट्री: डॉ. राजेश्वर सिंह

–अमरता नहीं, हर नागरिक को मिले स्वस्थ और सम्मानजनक दीर्घायु जीवन: डॉ. राजेश्वर सिंह

AI और बायोटेक्नोलॉजी से बदलेगा मानव जीवन का भविष्य, युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर

लखनऊ, 04 नवंबर।

सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने वैश्विक स्तर पर तेजी से विकसित हो रहे दीर्घायु विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण संभावनाओं में से एक बताते हुए युवाओं से इस क्षेत्र में ज्ञान, कौशल और नवाचार के लिए तैयार होने का आह्वान किया।

डॉ. सिंह ने कहा कि दुनिया में अब उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को केवल प्राकृतिक नियति नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के माध्यम से समझने और बेहतर बनाने की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।  द इकोनॉमिस्ट की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष लॉन्जेविटी बायोटेक कंपनियों ने 18.4 अरब डॉलर का निवेश जुटाया, जो पिछले दस वर्षों के कुल निवेश से भी अधिक है।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में वैश्विक निवेश और अनुसंधान की गति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अल्टोस लैब्स ने वर्ष 2022 में 3 अरब डॉलर जुटाए, जबकि एली लिली ने एआई आधारित दवा अनुसंधान कंपनी  इनसिलीको मेडिसिन के साथ 2.75 अरब डॉलर तक के संभावित समझौते पर हस्ताक्षर किए। सैम ऑल्टमैन द्वारा समर्थित रेट्रो बायो साइंसेज का लक्ष्य मानव जीवन में 10 स्वस्थ वर्ष जोड़ने की संभावनाओं पर अनुसंधान करना है।

डॉ. सिंह ने कहा कि ए आई  हेल्थकेयर और बायोलॉजी का संगम आने वाले दशकों की सबसे बड़ी औद्योगिक और आर्थिक क्रांतियों में से एक बन सकता है। एआई आधारित दवा अनुसंधान, बायोलॉजिकल एजिंग क्लॉक्स और एपीजेनेटिक रिप्रोग्रामिंग जैसी तकनीकें भविष्य में बीमारियों की रोकथाम और स्वस्थ जीवन की अवधि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार, कुछ नई तकनीकें शरीर की जैविक उम्र का अनुमान लगाने और उम्र से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को समझने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वहीं, उम्र बढ़ने से प्रभावित कोशिकीय प्रक्रियाओं को पुनर्संतुलित करने के लिए भी अनुसंधान जारी है। हालांकि, इन तकनीकों की व्यापक प्रभावशीलता और सुरक्षा स्थापित करने के लिए अभी और चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत के युवाओं को इस परिवर्तन का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और नेतृत्वकर्ता बनना होगा। भारत को स्वास्थ्य तकनीक,एआई आधारित औषधि अनुसंधान, बायोटेक्नोलॉजी और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के लिए अनुसंधान, स्टार्टअप्स और कौशल विकास को प्रोत्साहित करना चाहिए। यह क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण के नए अवसर उत्पन्न कर सकता है।

उन्होंने साथ ही आगाह किया कि दीर्घायु विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे सभी दावों को वैज्ञानिक प्रमाणों और चिकित्सकीय परीक्षणों के आधार पर ही स्वीकार किया जाना चाहिए। अप्रमाणित उपचारों और महंगे व्यावसायिक दावों से सतर्क रहना आवश्यक है।

डॉ. सिंह ने कहा कि स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की बुनियाद आज भी संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और नशामुक्त जीवनशैली है। वैज्ञानिक प्रगति का वास्तविक उद्देश्य केवल संपन्न वर्ग के लिए जीवन बढ़ाना नहीं, बल्कि हर नागरिक को स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन के अधिक वर्ष उपलब्ध कराना होना चाहिए।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भविष्य की स्वास्थ्य क्रांति के लिए स्वयं को तैयार करें और भारत को एआई  बायोटेक्नोलॉजी तथा दीर्घायु विज्ञान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर एवं वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाने में योगदान दें।

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