उत्तर प्रदेश

सपा और कांग्रेस पर डॉ॰ संजय निषाद का हमला

लखनऊ। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह से हताश है। जनता से लगातार मुंह की खाने के बाद अब विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस-सपा समेत विपक्षी दल चुनाव जीतने पर अपनी पीठ थपथपाते हैं, लेकिन हार मिलते ही ईवीएम और चुनाव आयोग को दोष देने लगते हैं। सपा और कांग्रेस जैसे दल अब भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। जनता से मिली हार को विपक्षी दल पचा नहीं पा रहे हैं। डॉ. निषाद ने कहा कि रात-दिन संविधान की दुहाई देने वाले यही लोग संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रहे हैं।

देश पर आपातकाल थोपने वाली कांग्रेस का संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों पर कितना विश्वास रहा है, इसे देश अच्छी तरह जानता है। आज समाजवादी पार्टी उसी कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए छटपटा रही है। उन्होंने कहा कि जिस ईवीएम के माध्यम से कांग्रेस केंद्र और कई राज्यों में सत्ता में आई, आज उसी ईवीएम को ब्लैक बॉक्स बताकर देश की चुनाव प्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले सपा प्रमुख को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसी ईवीएम की वजह से वह सांसद और मुख्यमंत्री भी रहे हैं।
SIR को लेकर भी विपक्ष फैला रहा है भ्रम मा० मंत्री ने कहा कि जिस SIR को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव हाय-तौबा मचा रहे हैं, वह पहली बार नहीं हो रहा है। देश में वर्ष 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी SIR हो चुका है।
उन्होंने कहा कि SIR में उन लोगों को भी अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का अवसर दिया गया, जिनके नाम छूट गए थे। उन्हें फॉर्म भरने का पूरा मौका दिया गया है। मा० हाईकोर्ट ने भी फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग के कदम को सही माना है।

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की व्यवस्था हमेशा से मौजूद रही है और जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से अपना नाम जुड़वा सकते हैं। इसमें विपक्षी दलों को हाय-तौबा करने की आवश्यकता नहीं है। डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि जनता ने हम पर विश्वास जताया है और NDA की सरकार को अपना आशीर्वाद दे रही है। लेकिन सत्ता की चाह में सपा-कांग्रेस जनता का भी अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की पोल जनता के सामने खुल चुकी है और जनता उन्हें खारिज कर चुकी है। अपनी इस स्थिति को छिपाने के लिए सपा-कांग्रेस चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।

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