उत्तर प्रदेश

अन्न की बर्बादी रोकना किसान की मेहनत और प्रकृति के संसाधनों का सम्मान: डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ | 28 सितंबर 2026

वैश्विक खाद्य बर्बादी के चिंताजनक आँकड़े

International Day of Awareness of Food Loss and Waste के अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि अन्न की बर्बादी केवल भोजन का नुकसान नहीं है। इसके साथ किसान का श्रम और पानी, भूमि तथा ऊर्जा जैसे बहुमूल्य संसाधन भी व्यर्थ होते हैं।

FAO के अनुसार:

  • दुनिया में उत्पादित भोजन का लगभग 13% हिस्सा retail तक पहुँचने से पहले नष्ट हो जाता है।
  • उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध भोजन का करीब 19% हिस्सा retail, food services और घरों में बर्बाद होता है।
  • यह कुल बर्बादी लगभग 1.05 अरब टन भोजन प्रतिवर्ष है।
  • Food Loss & Waste से वैश्विक greenhouse-gas emissions का लगभग 8–10% जुड़ा है।

डॉ. सिंह ने कहा कि ये आँकड़े बताते हैं कि खेत से बाजार और बाजार से थाली तक उपज को सुरक्षित पहुँचाना, उत्पादन बढ़ाने जितना ही महत्वपूर्ण है। भोजन की बर्बादी कम करना खाद्य सुरक्षा, किसान हित और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में जरूरी कदम है।

बेहतर भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था की जरूरत

बेहतर भंडारण, cold-chain, परिवहन, food processing और value addition से फसल के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना जैसी पहलें आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हैं।

पहल घर और थाली से करनी होगी

उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत हर घर से हो सकती है—जितनी जरूरत हो उतना ही भोजन लें, भोजन का सही भंडारण करें, बचे हुए भोजन का उपयोग करें और जैविक कचरे से खाद बनाने जैसी आदतें अपनाएं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि Net Zero Sarojininagar के व्यापक विजन में संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग महत्वपूर्ण है। सौर ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और जल संरक्षण के साथ भोजन की बर्बादी रोकना भी टिकाऊ और Net Zero भविष्य की दिशा में जरूरी कदम है।

अन्न का सम्मान किसान की मेहनत और प्रकृति के संसाधनों का सम्मान है। अन्न का हर दाना—किसान, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए अनमोल है।

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