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गाजीपुर थाना क्षेत्र में कथित अवैध कारोबार को लेकर उठे सवाल, पुलिस की निगरानी पर चर्चा

ब्यूरो रिपोर्ट — ऋषभ तिवारी, Kisan Mail News

फतेहपुर। गाजीपुर थाना क्षेत्र में कथित अवैध देशी गुटखा, शराब और गांजा कारोबार को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में गोकशी समेत अन्य अवैध गतिविधियों की शिकायतों के बीच पुलिस की निगरानी और कार्रवाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से क्षेत्र में कथित रूप से अवैध देशी गुटखा कारोबार संचालित होने की बात सामने आ रही है। इसके साथ ही अवैध शराब और गांजे की बिक्री को लेकर भी शिकायतें किए जाने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि इन गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो नियमित पुलिस गश्त और निगरानी के बावजूद इन पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है।

‘मासिक सेटिंग’ के दावे की जांच जरूरी

कुछ स्थानीय सूत्रों ने अवैध गतिविधियों के पीछे कथित ‘मासिक सेटिंग’ होने का दावा किया है और इसमें कुछ पुलिसकर्मियों व संबंधित विभाग के कर्मचारियों की भूमिका होने की बात कही है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे गंभीर आरोपों की सत्यता केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

गोकशी के मामलों में पुलिस कार्रवाई भी सामने आई

फतेहपुर में हाल के दिनों में गोकशी के मामलों में पुलिस की कार्रवाई सामने आई है। 25 सितंबर को धाता थाना क्षेत्र में गोकशी के एक मामले में पुलिस ने मुठभेड़ के बाद एक आरोपी को गिरफ्तार करने और अन्य आरोपियों को पकड़े जाने की जानकारी दी थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से तमंचा, कारतूस और अन्य सामान बरामद हुआ।

ऐसे मामलों के बीच गाजीपुर थाना क्षेत्र में सामने आ रही स्थानीय शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि किसी पुलिसकर्मी या अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो जांच के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।

उच्चाधिकारियों से जांच की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि कथित अवैध कारोबार वास्तव में संचालित हो रहा है या नहीं और यदि हो रहा है तो इसके पीछे कौन लोग हैं।

Kisan Mail News की ओर से स्पष्ट किया जाता है कि खबर में उल्लेखित ‘मासिक सेटिंग’, पुलिसकर्मियों की कथित मिलीभगत तथा अवैध कारोबार से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का बयान मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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